1. लखनऊ : उत्तरप्रदेश विधानसभा चुनाव की घोषणा हो चुकी है। सभी पार्टियां जीत का दावा कर रही हैं, पर क्या लखनऊ का ताज इतना आसान है? सवाल बहुत हैं, आखिर लखनऊ की सल्तनत का ताज किसके सर सजेगा। सभी पार्टियां अपनी राजनीतिक तिकड़मबाजियों में लगी हुई हैं, जातिगत समीकरणों का भी पूरा ख्याल रखा जा रहा है। इस पूरी रस्साकशी में यूपी का मुस्लिम वोटर्स “की वोटर्स” की भूमिका में फिर सामने आ रहा है। यूपी की जनता का एक मिजाज़ है, यूपी का वोटर किसी भी पार्टी का स्थाई वोटर नहीं है। हर चुनाव में यूपी का मिजाज़ बदलता है, यूपी का मन बदलता है।  यूपी ने कांग्रेस को सत्ता से बाहर फेका था, भाजपा के सर यूपी का ताज सजा था। फिर बसपा को छप्पर फाड़कर यूपी ने अपना मत दिया। अगली बारी समाजवादी पार्टी की थी, सपा के लिए यूपी ने अपना दिल बिछा दिया। बारी आई 2014 के लोकसभा की, नरेंद्र मोदी के तेजस्वी भाषण और वादों के पीछे यूपी की जनता ने भाजपा को दिल्ली की सल्तनत तक पहुँचाने में अहम भूमिका निभाई। अब उत्तरप्रदेश में फिरसे कालीन बिछ चुका है। देखना है, इस बार यूपी की जनता किसे ताज पहनायेगी।

उत्तरप्रदेश में मुस्लिम, ब्राम्हण,यादव,दलित , जाट एवं कुर्मी वोटर बड़ी संख्या में है। ब्राम्हणों का रुख कांग्रेस और भाजपा में दिख रहा है, वैसे भी उत्तरप्रदेश का ब्राम्हण कांग्रेस और भाजपा में बराबर बंटता है। वहीँ यादव वोट समाजवादी पार्टी का फिक्स वोटर माना जाता है, तो मुस्लिम वोट सपा और कांग्रेस की तरफ जाता है। बचा हुआ मुस्लिम वोटर बसपा और अन्य में बंट जाता है, पर इस बार मुस्लिम समुदाय का बड़ा तबका बसपा की तरफ रुख किया हुआ है । कांग्रेस बहुत हद तक मुस्लिम वोटर्स को अपने पाले पर लाने में कामयाब होते दिख रही है। रही बात बसपा की तो दलित वोटर भाजपा की तरफ खिसकता हुआ नज़र आ रहा है। इसलिए मायावती मुस्लिम वोटर्स को अपनी तरफ़ खींचने की भरसक कोशिश करती नज़र आ रही है। यही वजह है, कि वह मुस्लिम वोट जो बसपा की और खिसक रहा था, अब कांग्रेस और सपा के साथ जाता नज़र आ रहा है।

उत्तर प्रदेश में इस बार आल इण्डिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन AIMIM भी मैदान में है, और दलित मुस्लिम वोट पर इस पार्टी की निगाहें हैं। बिहार विधानसभा चुनावों में भी MIM ने अपने उम्मीदवार उतारे थे, पर बिहार के मुस्लिमों ने महागठबंधन का साथ दिया था। फ़िलहाल उत्तरप्रदेश में MIM के पास कोई बड़ा चेहरा नज़र नहीं आ रहा, इसलिए मुस्लिम वोटर्स का MIM की तरफ जाने की संभावनाएँ बहुत कम नज़र आ रही हैं। ऐसी संभावना भी व्यक्त की जा रही है, कि इस बार उत्तरप्रदेश का मुस्लिम वोटर फिर चौंकायेगा।



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