अकबर के बाद जहांगीर को मुगल साम्राज्य मिला जो एक समृद्ध साम्राज्य था और दुनिया के गिने चुने शक्तिशाली राज्यों में से एक था।

अंग्रेज़ो ने ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना की और विभिन्न साम्राज्यों में व्यापार के लिए अपने दूत भेजे।

16 वी शताब्दी में सर टॉमस रो जहांगीर के दरबार में आया और येन केन प्रकरेण उसको खुश किया। खुश होकर जहांगीर ने पूछा तुम्हे क्या चाहिये तो टॉमस रो ने कहा कि हमे “Ease Of Doing Buisness” चाहिये।
जहांगीर ने पूछा वो क्या होता है तो टोमस रो ने कहा बादशाह आपके सैनिक और कर्मचारी भ्रष्ट है अतः आपसे एक निवेदन है कि हमें जमीन दे दीजिए और उसकी किलेबंदी करने की आज़ादी दे दीजिए ।

जहांगीर ने उन्हें ये अनुमति दे दी जिसको अंग्रेज़ो ने “Ease Of Doing Buisness ” का नाम दिया।

गुजरात के सूरत में अंग्रेजों ने पहली कोठी खोली। फिर उसके बाद मछलीपट्टनम आज का मद्रास की स्थापना की। धीरे धीरे डच और पुर्तगाली भी भारत में अपनी कोठिया “Ease Of Doing Buisness” स्कीम के तहत स्थापित कर पाए।बाद में अंग्रेजों ने अपनी कोठियों में अपने खुद के सिक्के चलाने शुरू किए और अपनी सेना रखने लगे।

सिक्के चलाने पर मुगल शासक नाराज़ हो गए लेकिन तत्कालीन शासक औरंगज़ेब से माफी मांग कर फिर से “Ease Of Doing Buisness” के नाम पर करों में माफी ले ली।

धीरे धीरे “Ease Of Doing Buisness ” के नाम पर वो उनके मतलब की नीतियाँ मुगलो से बनवाने लगे और भारत धीरे धीरे विदेशी शक्तियों का गुलाम हो गया और मुगल साम्राज्य का पतन हो गया। उसके बाद भारत 200 साल से भी अधिक ब्रिटेन के साम्राज्य के अधीन रहा।

वैसा ही कुछ आज की मौजूदा भारत सरकार “Ease Of Doing Buisness” के नाम पर कर रही है। क्योंकि भारत में श्रमिक कानून को कमजोर करके श्रमिको के अधिकार समाप्त कर दिए गए है।इसके साथ ही पेंशन और कर्मचारियों के लिए व्यापारियों को जो सुविधा उनके कर्मचारियों को देनी होती थी वो भी काफी हद तक समाप्त कर दी गयी है। विदेशी निवेश के लिए भारत की जमीन को विदेशी शक्तियों के अधीन किया जा रहा है।

यह एक सार्वभौमिक सत्य है कि अगर पश्चिमी शक्तियां सरकार की पीठ थपथपा रही है इसका मतलब सरकार उनके पक्ष की नीतियाँ बना रही है और भारत की जनता की आँखों में धूल झोंक रही है जिसके परिणाम आगे आने वाले समय में बहुत ही घातक सिद्ध होंगे।

 



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