भारतीय जन का नेतृत्व करने वाले नेता यदि खुद ही अभद्रता पर उतर आए तो लोगों का उन पर से विश्वास उठना निश्चित है। यह बात उत्तर प्रदेश के संत कबीर नगर की है, जहां BJP के सांसद एवं विधायक के बीच जूते-घुसे और गाली गलौच हुई। घटना 6मार्च 2019 की है।

 

यह घटना संत कबीर नगर जिला योजना समिति की सभा के दौरान हुई।भारतीय जनता पार्टी के संत कबीर नगर (उ.प्र.) से सांसद शरद त्रिपाठी और विधायक राकेश सिंह बघेल में हाथापाई हुई।BJP संसद शरद त्रिपाठी उद्घाटन पटल पर अपना नाम न होने से नाराज़ थे। इसी दौरान दोनों में बहस होने लगी। बहस के दौरान ही संसद शरद त्रिपाठी उठे और विधायक राकेश बघेल की जूतों से जमकर धुनाई कर दी। शरद त्रिपाठी जी ने राकेश बघेल पर पांच सेकंड में 9 बार जूतों से सुताई की, जिसके जवाब में राकेश बघेल ने संसद शरद त्रिपाठी पर हमला कर दिया।

जिसके बाद पुलिस बल को बीच बचाव में आना पड़ा। बात यहाँ तक बढ़ गयी कि राकेश बघेल जी के गुस्से के कारण संसद शरद त्रिपाठी को खुद को कमरे में बंद करना पड़ा। जबकि राकेश की समर्थक सभा कक्ष से निकलने का नाम नही ले रहे थे। इस घटना के कुछ समय बाद संसद व विधायक के समर्थक भी एक दूसरे से भिड़ गए व पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा। घटना से लोगों में BJP संसद व विधायक के खिलाफ विरोध व आक्रोश की भावना है। शरद त्रिपाठी जी ने घटना के संबंध में कहा “मुझे इस घटना पर बहुत खेद है व मुझे इस घटना पर बहुत बुरा लगा है। यह एक क्रिया की प्रतिक्रिया थी जो मेरे सामान व्यहवार के विरुद्ध थी। यदि प्रदेश अध्यक्ष द्वारा मुझे बुलाया गया तो में उनके सामने अपनी बात जरूर रखूंगा।” अब देखने वाली  बात यह होगी उत्तर प्रदेश में बढ़ती गुंडा गर्दी के चलते यदि नेता ही इन बातों पर उतर जाए तो क्या वे खुद गुंडे बन चुके है। और यदि यह सच है जमता को ऐसे नेताओं पर कितना विश्वास करना चाहिए।

सोशल मीडिया पर लोगों ने इस घटना पर जमकर चुटकी ली। लोगों ने इस घटना की तुलना BJP IT CELL द्वारा चलाए गए ट्रेंड #MeraBoothSabseMajboot से की। लोगों ने वोटिंग बूथ की जगह BJP संसद के बूट का प्रयोग करने का सुझाव तक दिया। कई लोगों ने इस घटना को सर्जिकल स्ट्राइक V3 का नाम दिया। वही कुछ युवकों ने इस बात तक पर ध्यान दिलाया राष्ट्र शांति के लिए कार्य कर रहे हमारे PM मोदी जी की हँसती तस्वीर के सामने यह सब घटना हुई।

इस घटना से जनता के लिए समझने वाली बात यह है  कि जन नेतृत्व करने वाले नेता ही उद्घाटन पट पर अपना नाम न होने जैसी बात से जुत्तों और गाली गलौच पर पहोंच सकते है, तो क्या यह नेता सही मायने में जन नेतृत्व करते है।



डिस्क्लेमर :इस आलेख में व्यक्त राय लेखक की निजी राय है। लेख में प्रदर्शित तथ्य और विचार से UPTRIBUNE.com सहमती नहीं रखता और न ही जिम्मेदार है
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