हाल ही में समाजवादी पार्टी ने अपने 25 साल पूरे किये हैं और अपने इस 25 साल के सफर में पार्टी ने बहुत से  उतार-चढ़ाव देखें हैं। किसी भी पार्टी के लिए इतना लंबा सफर तय करना आसान बात नहीं होती है। सपा सुप्रीमों
मुलायम सिंह यादव ने जहां इस पार्टी को अपने  खून से सींचा है वहीं प्रदेश इकाई अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव ने पार्टी में एक संकटमोचन की भूमिका अदा की है।
पार्टी को मजबूत बनाने में शिवपाल यादव ने हर कदम पर  मुलायम सिंह का साथ दिया और शायद यही वजह है जो मुलायम सिंह पार्टी में उन्हें  इतनी तहरीज देते हैं। वहीं शिवपाल भी अपनी जिम्मेदारियों को बखूबी निभाना जानते हैं
तभी तो कुछ दिनों पहले  पार्टी में हुई  उठापटक के बाद भी वह 2017 में होने वाले विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुट गए और जिस निष्ठा के साथ वह अपने दायत्वि का निर्वहन करते हैं वह खुद उन्हें अपने आप में एक
कद्दावर नेता साबित करता है। फिलहाल शिवपाल यादव  सात दिसंबर को बरेली में होने वाली नेता जी यानि
मुलायम सिंह यादव  की रैली की तैयारियों में जुटे हुए हैं और इसके लिए उन्होंने  रविवार को बैठक भी  बुलाई है। पूर्वांचल रैली के बाद सपा रूहेलखंड में रैली करने जा रही है। रैली को सफल बनाने की जिम्मेदारी प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल को सौंपी गई है। ऐसी बहुत ही बातें जो ये साबित करती हैं की शिवपाल यादव सपा और मुलायम सिंह के लिए इतने अहम् क्यों हैं

जमीनी नेता के तौर पर की शुरुआत
शिवपाल यादव के बारे में बात करें तो कहा  जाता है कि उन्होंने पार्टी को मजबूत बनाने के लिए जमीनी स्तर से कार्य किया है। वे शुरू से ही सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय रहे हैं। यूपी के विभिन्न क्षेत्रों में घूम-घूमकर वे लोगों की मदद किया करते थे। उनके बारे में बताया जाता है कि उन्होंने मुलायम सिंह के चुनावों में पर्चे बांटने से लेकर
बूथ-समन्वयक तक की जिम्मेदारी उठाई थी।

कैसे शुरू हुआ  राजनैतिक करियर
शिवपाल यादव साल 1988 से 1991 और फिर 1993 में जिला सहकारी बैंक, इटावा के अध्यक्ष चुने गए। 1995 से लेकर 1996 तक वे इटावा के जिला पंचायत अध्यक्ष भी रहे। इसी बीच 1994 से 1998 के बीच शिवपाल यादव उत्तरप्रदेश सहकारी ग्राम विकास बैंक के भी अध्यक्ष का दायित्व संभाला। तेरहवीं विधानसभा में वे जसवन्तनगर से विधानसभा का चुनाव लड़े और ऐतिहासिक मतों से जीते। इसी साल वे समाजवादी पार्टी के प्रदेश महासचिव बनाए गए।
उन्होंने संगठन को मजबूत बनाने के लिए कठोर मेहनत की।समर्पण की भावना से बड़ा कद शिवपाल  यादव के अंदर पार्टी को लेकर समर्पण और त्याग की जो भावना है उसने ही  उनकी लोकप्रियता और स्वीकार्यता को बढ़ाया। प्रमुख महासचिव के रूप में उन्होंने अपनी जिम्मेदारी को नया आयाम दिया। प्रदेश अध्यक्ष रामशरण दास के बीमार होने के बाद 1 नवंबर, 2007 को मेरठ अधिवेशन में शिवपाल यादव को कार्यवाहक अध्यक्ष बनाया गया।

कार्यकर्ताओं पर मजबूत पकड़
मुलायम सिंह यादव यह बात अच्छे तरीके से जानते हैं कि चुनाव जीतने के लिए एक मजबूत संगठन और निष्ठावान संगठनकर्ता की जरूरत होती है। संगठन के काम के लिए शिवपाल यादव पार्टी के सबसे उपयुक्त चेहरे हैं। उन्होंने नेता जी
के साथ दशकों तक पार्टी संगठन में काम किया है और पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच उनकी बहुत ही गहरी पैठ है।



डिस्क्लेमर :इस आलेख में व्यक्त राय लेखक की निजी राय है। लेख में प्रदर्शित तथ्य और विचार से UPTRIBUNE.com सहमती नहीं रखता और न ही जिम्मेदार है
SHARE

आपकी प्रतिक्रिया