देश में राजनीति बहुत बदली बदली सी नज़र आ रही है। राजनीतिक पार्टियों का एक दूसरे पर आरोप आरोप प्रत्यारोप का दौर तेज़ हो गया हैं। अब यहाँ कोई सीमा नहि रह गई हैं। शब्दों के बाण तेज़ होते जा रहे हैं।  जैसे जैसे पाँच राज्यों के चुनाव नज़दीक आ रहे है, वैसे वैसे भाषा का अश्तर गिरता हीं जा रहा हैं।

जहाँ एक तरफ़ राहुल गांधी प्रधानमंत्री मोदी को घेरने का कोई मौक़ा भी छोड़ रहे हैं। और अपना हमला तेज़ करते हुए, अपनी रैलीयो में प्रधान मंत्री मोदी पर सीधे उधयोगघरानो से पैसे लेने का आरोप लगा रहे हैं।

वहीं नोटेबंदी के मुद्दे पर चौतरफ़ा घिरी सरकार और मोदी, देश में लगे आर्थिक आपात काल का जवाब भी नहि पा रहे हैं। जनता note बंदी के फ़ैशले की वजह से बेहद परेशान हैं।देश में रोज़गार में कमी आयी हैं। किसान परेशान हैं, किसान को फ़सलो की क़ीमत भी मिल रही हैं। बोवनी का समय चल raha हैं, कैश की समस्या की वजह से किसान बीज और खाद भी ख़रीद पा रहे हैं।हमेशा के तरह मोदी जी सिर्फ़ देश के लोगों को आश्वासन हाई दे रहे है अभी तक।

इससे उलट राहुल गांधी नोटबंदी को लेकर जनता के बीच रैलीयॉ कर रहे है। और हाल ही के दीनो में हुई राहुल गांधी की रैलीयो में अच्छी खाशी भीड़ उमड़ रही हैं।ये भीड़ राजनैतिक भी हो सकती है। परंतु जिस तरह से  कोंग्रेस और राहुल गांधी को जनता का समर्थन बड़ रहा हैं। ये भाजपा के लिए ख़तरे की घंटी हैं।

वहीं दूसरी तरफ़ प्रधानमंत्री मोदी अपनी रैलीयो  में राहुल गांधी की मिमिक्रि करते हैं, मज़ाक़ उड़ाते हैं, और वादे किए जाते हैं।

वही एक तरफ़ जब राहुल गांधी की रैली में मोदी मूर्दाबाद के नारे लग रहे तो उन्होंने लोगों को ऐसा करने से रोक दिया था और कहा था की ये कोंग्रेस की सभ्यता और परंपरा नहि हैं। वो हमारे प्रधानमंत्री हैं। ये राजनीतिक लड़ाई हैं। और हमें हमारे प्रधानमंत्री का सम्मान करना चाहिए।

वहीं प्रधानमंत्री मोदी देश के प्रधानमंत्री की गरिमा के उलट आपने भाषणों में विपक्षी दलो और उनके नेताओं पर अशतरहिन टिप्पणियाँ करते हैं। मोदी जी के भाषणों में ख़ासतौर पर राहुल गांधी और गांधी परिवार पर आरोप लगते हैं।

प्रधानमंत्री एक संवैधानिक पद है, और इस पर बैठने वाला व्यक्ति व्यक्तिगत और पार्टी से ऊपर होता हैं। वो पूरे देश का प्रधानमंत्री होता हैं। उसकी एक गरिमा होती हैं।

परंतु इस तरह की एक छोटे नेता जैसे स्तरहीन बयान प्रधानमंत्री की गरिमा को ठेश पहुँचाते हैं।



डिस्क्लेमर :इस आलेख में व्यक्त राय लेखक की निजी राय है। लेख में प्रदर्शित तथ्य और विचार से UPTRIBUNE.com सहमती नहीं रखता और न ही जिम्मेदार है
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