सुल्तानपुर। पुरे मुल्क में हिंदुस्तान की गंगा जमुनी तहज़ीब की मिसाल दी जाती है और हो भी क्यों न। हर मज़हब के लोग हर मौके पर कौमी एक्जहति की मिसाल पेश करते रहे हैं। ऐसी ही मिसाल है दरगाह हज़रत अब्बास तक जाने वाला ताज़िया का जुलूस। मुहर्रम की 10 तारीख को अपने रवायती अंदाज़ में निकलने वाले इस जुलुस की खासियत इसका अंदाज़ है। दरगाह हज़रत अब्बास का निर्माण 1938 में रिटायर्ड डिप्टी कलेक्टर ग़ुलाम मेहंदी साहब ने करवाया था। तब से आज तक बदस्तूर ये रवायती मुहर्रम का जुलुस लगातार निकल रहा है।
sultanpur
हिन्दुओं की आस्था की जीती जागती मिसाल बना जुलुस
दरगाह हज़रत अब्बास पर सबसे ज़्यादा आस्था हिन्दू वर्ग की है।10 मुहर्रम के मौके पर जिले से ही नहीं बल्कि बाहर के जिलो के लोग शामिल होते हैं।और पूरी आस्था से इस जुलुस में मातम और नोहा के बीच ताज़िया दफ़न करते है। मौजूद दरगाह मुतवल्ली ज़हीर ज़ैदी ने बताया की हर साल तादाद में इज़ाफ़ा होता रहता है। लोगों की आस्था का अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है की सूरज निकलने से पहले ही गैर जिलों के लोग यहां पहुंचने लगते हैं और मजलिस में शामिल होकर ताज़िया के रवायती जुलुस का हिस्सा बनतेहैं।
sultanpur
इमाम हुसैन की शहादत का ग़म हमको भी है
इमाम हुसैन की शहादत का ग़म हमको भी है ये बातें जुलुस में शामिल सभी हिन्दू वर्ग में दिखाई देती है ताज़ियादारों में श्यामलाल गुप्ता निवासी बुआपुर, प्रतापगढ़, राजेश यादव निवासी भवानीपुर, फैज़ाबाद, रणजीत सिंह निवासी अल्लाह्पुर, इलाहबाद, दयाराम पटेल निवासी मटियार, जौनपुर, संतोष पटेल, राहुल सरोज, पन्नालाल निवासी इलाहबाद आदि शामिल हुए ।


डिस्क्लेमर :इस आलेख में व्यक्त राय लेखक की निजी राय है। लेख में प्रदर्शित तथ्य और विचार से UPTRIBUNE.com सहमती नहीं रखता और न ही जिम्मेदार है
SHARE

आपकी प्रतिक्रिया