समाजवादी पार्टी में युवा अखिलेश यादव ने अपने पिता मुलयम सिंह यादव का तख्तापलट कर दिया और पार्टी पर करीब करीब कब्ज़ा कर लिया है भारत की राजनीति में आज़ादी से पूर्व और आज़ादी के बाद भी ऐसे उदहारण है
मध्य युग का सबसे प्रचलित तख्तापलट की घटना है औरंगजेब का शाहजहां का तखतापलट है सबसे गौरतलब बात यहाँ है की शाहजहां को जेल में कैद करने के बाद औरंगजेब ने काफी सख्त और एक कड़े प्रशासक के रूप में काम किया परंतु औरंगजेब के बाद मुग़ल शासन का पतन शुरू हुआ क्योंकि औरंगजेब ने गद्दी के लिए जो उदहारण प्रतिरूपित किया वही आने वाली नस्लो ने अंगीकृत किया और वो शासन चलाने से ज्यादा दरबारियो की बातो से आगे नहीं निकले
दूसरा उदहारण है आज़ाद भारत का 1969 का कांग्रेस की टूट का सिंडिकेट के दौर में कांग्रेस काफी मज़बूत हुआ करती थी और वामपंथी सेक्युलर विचारधारा के साथ साथ उसकी दक्षिणपंथी विचारो पर भी अच्छी पकड़ थी और उसने 1969 तक राष्ट्रीय स्वम्सेवकसंघ और जनसंघ को वो जगह लेने नहीं दी सिंडिकेट को खत्मक करने के बाद से ही कांग्रेस की कामराज जैसे क्षेत्रीय नेताओ को किनारे कर दिया गया और उन राज्यो में कांग्रेस भी विलुप्त हो गयी
हालाँकि 1969 की घटना को भारतीय इतिहासकार ये लिखते है की ये कांग्रेस और भारत में इंदिरा युग का उदय था परंतु अगर इस घटना का अवलोकन किया जाए तो ये कांग्रेस के पतन की शुरुआत थी 1969 के बाद कांग्रेस कमजोर हुई इसी से बचने के लिए जनमानस को राष्ट्रीयता की तरफ 1971 के युद्ध ने किया और कांग्रेस को अभूतपूर्व समर्थन प्राप्त हुआ परंतु सिंडिकटे के नेताओ के समर्थको ने समाजवादी आंदोलन शुरू किया और इंदिरा गाँधी की कुर्सी डोलने लगी इस समय संजय गाँधी यूथ कांग्रेस के युवा कंधो पर सवार होकर अखिलेश की तरह राजनीति का नया सवेरा थे अखिलेश की युवा ब्रिगेड और संजय वही काम करने लगे जो औरंगजेब के बाद के शासको ने किया एक दूसरे को निपटने का और इस ऊर्जा का इस्तेमाल यूथ कांग्रेस ने किया विरोधियो का दमन करके
फलस्वरूप इंदिरा चुनाव हार गयी परंतु तब की जनता सरकार भी औरंगजेब के पश्च्यात के शासको की राह हरकते करने लगे और वो भी जनमानस से उतर गए इंदिरा फिर जीती पर उतनी ताकत से नहीं इंदिरा की हत्या के बाद सहानभूति की लहर पर सवार होकर केंद्र मैं कांग्रेस आयी ज़रूर पर राज्यो मैं उसका आधार खिसखने लगा और वो धीरे धीरे करके सिमटने लगी

गौरतलब बात ये है की जब जब राजनीती के के वटवृक्षो को हिलाया गया है सत्ता के युवराजों ने तब तब उन्हें तात्कालिक लाभ तो हुआ है परंतु लंबे काल में वो विचारधारा सिमट गयी अखिलेश युवा कंधो पर सवार तो है और 2009 के राहुल गाँधी की तरह युवा सम्राट तो हो गए परंतु जल्दी ही वही युवा वर्ग उन्हें जमीन पर ले आया



डिस्क्लेमर :इस आलेख में व्यक्त राय लेखक की निजी राय है। लेख में प्रदर्शित तथ्य और विचार से UPTRIBUNE.com सहमती नहीं रखता और न ही जिम्मेदार है
SHARE

आपकी प्रतिक्रिया