मुंबई। हाल ही में ‘चौकीदार को चोर’ बताने वाले शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे अंततः भारतीय जनता पार्टी के आगे नतमस्तक हो ही गए। सोमवार को भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के साथ मुंबई में एक संयुक्त प्रेस कांफ्रेंस के दौरान महाराष्ट्र में लोकसभा और विधानसभा चुनाव साथ-साथ मिलकर लड़ने की घोषणा की गई। महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अशोक चव्हाण ने भाजपा-शिवसेना गठबंधन को शिवसेना की लाचारी करार दिया है। चव्हाण ने कहा कि उद्धव ठाकरे राफेल मामले पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चौकीदार चोर है जैसा बयान देते हैं जबकि सत्ता में बने रहने के लिए अपनी लाचारी प्रदर्शित करते हुए भाजपा के साथ चुनावी गठबंधन की घोषणा करते हैं।
          जानकारी के अनुसार महाराष्ट्र की कुल 48 लोकसभा सीटों पर 25 भाजपा और 23 शिवसेना के हिस्से में आयी हैं। जबकि विधानसभा चुनावों के लिए सभी 288 सीटों में से भाजपा-शिवसेना के सहयोगी दलों को सीटें तय करने के बाद दोनों फिफ्टी-फिफ्टी सीटों पर चुनाव लड़ेंगे। बता दें कि उद्धव ठाकरे की शिवसेना केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार में शामिल है फिर भी वे नोटबंदी पर सवाल उठाते रहे हैं। उन्होंने सरकार की जीएसटी नीति का भी खुलकर विरोध किया है। उद्धव ने तो हाल ही में भाजपा पर मंदिर मामले को लटकाने जैसा आरोप लगाते हुए ‘पहले मंदिर फिर चुनाव’ का बयान देकर एक तरह से भाजपा को डराने का प्रयास किया था।
     मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष संजय निरुपम ने शिवसेना को अवसरवादी सेना करार देते हुए कहा है कि उद्धव ठाकरे को जनता के सामने जवाब देना होगा कि वे पार्टी के मुखपत्र ‘दोपहर का सामना’ में चौकीदार को चोर बताने के बाद किस मुंह से चुनाव प्रचार करेंगे?
    बहरहाल, भाजपा-शिवसेना भले ही लोकसभा चुनाव मिलकर लड़ेंगे लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे घाटे का सौदा माना जा रहा है। जिस तरह से महाराष्ट्र में किसानों की आत्महत्या के मामलों में जोरदार बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है और किसानों की कर्जमाफी की घोषणा के बाद भी किसानों में नाराजगी है, उसका खामियाजा भाजपा के साथ ही शिवसेना को भी उठाना पड़ सकता है।


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