उत्तर प्रदेश में सत्ताधारी समाजवादी पार्टी के बीच चल रही तकरार कभी और बढ़ती लगती है तो अगले ही पल पार्टी में सुलह के आसार नजर आने लगते हैं। यूपी के सीएम अखिलेश यादव और उनके चाचा शिवपाल यादव के बीच पार्टी के महासचिव और राज्य सभा सांसद अमर सिंह को लेकर रार ठनी हुई है। सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव चाचा भतीजे की इस राजनीतिक जंग में शिवपाल और अमर सिंह के साथ नजर आ रहे हैं। सोमवार (24 अक्टूबर) को अखिलेश, मुलायम और शिवपाल के बीच लखनऊ में सार्वजनिक मंच पर कहासुनी हुई। लेकिन मंगलवार को मुलायम और शिवपाल ने संकेत दिया कि वो सुलह की तरफ बढ़ रहे हैं। लेकिन बुधवार को शिवपाल ने अखिलेश के करीबी माने जाने वाले मंत्री पवन पाण्डे को पार्टी से निकाल दिया। शिवपाल ने अखिलेश को चिट्ठी लिखकर पाण्डे को मंत्रिमंडल से निकालने का भी निवेदन किया है।

सपा के अंदरूनी झगड़े से पार्टी को होने वाले नुकसान की आशंका से उसके कई हितचिंतक चिंतित हैं। वो नहीं चाहते कि चुनाव से कुछ महीने पहले पार्टी टूटी-बिखरी नजर आए। मीडिया रिपोर्ट में दावा किया जा रहा है कि दिल्ली की जामा मस्जिद के शाही इमाम सैयद अहमद बुखारी सपा परिवार में जारी झगड़ में सुलह कराने की कोशिश कर रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार बुखारी ने मुलायम से अखिलेश के संग सुलह करने के लिए कहा ताकि पार्टी को इस संकट से उबारा जा सके। रिपोर्ट के अनुसार शाही इमाम बुखारी का मानना है कि सपा के अंदरूनी झगड़े से धर्मनिरपेक्ष ताकतें कमजोर होंगी और इसका फायदा भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को हो सकता है।

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सपा के इस झगड़े का फायदा बीजेपी और बसपा दोनों को होता नजर आ रहा है। एक तरफ बसपा प्रमुख मायावती मुसलमानों वोटरों को लुभाने की हर संभव कोशिश कर रही हैं तो दूसरी तरफ बीजेपी भी प्रदेश में अपना दो दशकों लंबा वनवास खत्म करने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा रही है। बीजेपी समाजवादी पार्टी का गढ़ माने जाने वाले इटावा में भी यादव परिवार को चुनौती देने का मूड बना चुकी है। 27 सितंबर को बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह इटावा में चुनावी सभा करेंगे। शाह जिस मैदान में रैली करेंगे वो मुलायम सिंह यादव के पैतृक गांव सैफई से महज 20 किलोमीटर दूर है।

बीजेपी उत्तर प्रदेश की बदहाली के लिए समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी को जिम्मेदार ठहराया रही है। सोमवार को यूपी के महोबा में एक रैली को संबोधित करते हुए  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनता से कहा कि जब तक आपलोग इन दोनों पार्टियों (सपा और बसपा) को सत्ता से बेदखल नहीं करेंगे तब तक राज्य उत्तम प्रदेश नहीं बन सकता है।

सपा में ताजा संकट तब शुरू हुआ जब रविवार को अखिलेश ने चाचा शिवपाल समेत चार मंत्रियों को कैबिनेट से बरखास्त कर दिया। वहीं शिवपाल यादव ने अखिलेश के करीबी माने जाने वाले सपा महासचिव और राज्य सभा सांसद रामगोपाल यादव को बाहर का रास्ता दिखा दिया। गौरतलब है कि शिवपाल और रामगोपाल दोनों ने एक दूसरे पर बीजेपी की कठपुतली होने का आरोप लगाया है।



डिस्क्लेमर :इस आलेख में व्यक्त राय लेखक की निजी राय है। लेख में प्रदर्शित तथ्य और विचार से UPTRIBUNE.com सहमती नहीं रखता और न ही जिम्मेदार है
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