लखनऊ । उत्तर प्रदेश में हो रहे निकाय चुनाव में कल 22 नवम्बर को पहले चरण की वोटिंग थी।जब पहले चरण के वोट पड़ रहे थे, तब कई जगह से ईवीएम मशीनों में गड़बड़ी पायी गई, और जम कर हंगामा हुआ। बाद में इन मशीनों को बदल दिया गया।

उत्तर प्रदेश में हो रहे निकाय चुनाव में पहले चरण में कानपुर, आगरा, मेरठ और कई जगहों से ख़बर आयी की ईवीएम मशीन में गड़बड़ है। इन सभी जगह से एक जैसी ख़बर आ रही थी, की वोट किसी भी पार्टी के प्रत्याशी को डालो पर लाइट भाजपा के प्रत्याशी के सामने की जल रही। इसको लेकर काफ़ी हंगामा सभी जगह हुआ। उसके बाद सभी जगह मशीनों को बदल दिया गया।

इसके बाद सभी दलो ने एक सुर में भाजपा पर ईवीएम से छेड़छाड़ का आरोप लगाया।

अब सवाल ये है की क्या अगर ईवीएम में कुछ ख़राबी थी। अगर थी तो सब जगह भाजपा को हि वोट क्यूँ हो रहे हैं।

ऐसा ही आरोप बीएसपी प्रमुख मायावती ने उत्तर प्रदेश चुनाव में भाजपा की बड़ी जीत के बाद लगया था ।

उसके बाद दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने भी इस आरोप को दोहराया था और दावा किया था की ईवीएम से छेड़छाड़ करके किसी पसंदीदा प्रत्याशी को वोट ट्रान्स्फ़र किया जा सकता है। इसका एक डेमो भी केजरीवाल ने दिल्ली विधानसभा में दिया था। जिसमें दिखाया गया था की ईवीएम से छेड़छाड़ करके पसंदीदा प्रत्याशी को वोट किया जा सकता है।

इसके बाद मध्य प्रदेश में हुए अटेर विधान सभा के उपचुनाव में चुनाव अधिकारी द्वारा पत्रकारों को ईवीएम से दिए जा रहे डेमो में भी एक बार फिर से यही गड़बड़ी सामने आयी। कोंग्रेस के निशान पर बटन दबाने पर भी लाइट भाजपा के निशान के सामने जल रही थी। इसके बाद चुनाव अधिकारी पत्रकारों को धमकाते हुए दिखी की ये ख़बर ना दिखाई जाए। फिर जाँच में पता चला की ये मशीन उत्तरप्रदेश से लाई गई थी , जिसका उपयोग उत्तरप्रदेश विधानसभा के चुनाव में हुआ था। जिससे उत्तर प्रदेश विधानसभा के चुनावों की निष्पक्षता पर सवाल उठते है।

इसी वर्ष के आख़िरी महीने में गुजरात में विधानसभा के चुनाव होने वाले है। ये चुनाव देश की दोनो हि बड़ी पार्टियों भाजपा और कोंग्रेस के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। भाजपा को अपनी 22 साल के गुजरात शासन की बनाए रखने की चुनौती है। और मोदी के 2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद गुजरात की अग्नि परीक्षा है। दूसरी वोर कोंग्रेस लगातार हार का मुँह देख रही हैं और अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही हैं। उसके लिए भी ये चुनाव महत्वपूर्ण हैं।

इस चुनाव में सुप्रीम कोर्ट ने VVPAT से चुनाव कराने के आदेश दिए है। परंतु जब इन VVPAT की जाँच की गई तो उसमें भी बहुत सारे VVPAT में गड़बड़ी पायी गई।

अब इससे ये सवाल ज़रूर उठाता है, की क्या भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में वोटों की चोरी सत्ता पक्ष के इशारों पर की जा रही है।

दूसरी तरफ़ चुनाव आयोग इन सभी आरोपो को ख़ारिज करता है। परंतु इतनी घटनाओं के बाद तो चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर भी उठते हैं।

हाल ही में नियुक्त हुये चुनाव आयुक्त की नियुक्ति पर भी विपक्ष सवाल खड़े कर चुका है। अब चुनाव आयोग को लोकतंत्र के इस महापर्व को निष्पक्ष और सफल बनाना हैं।



डिस्क्लेमर :इस आलेख में व्यक्त राय लेखक की निजी राय है। लेख में प्रदर्शित तथ्य और विचार से UPTRIBUNE.com सहमती नहीं रखता और न ही जिम्मेदार है
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