लखनऊ 20 अप्रैल 2020। कांग्रेस ने टांडा के रिज़वान हत्याकांड में पुलिस पर लीपा पोती कर दोषी पुलिसकर्मियों को बचाने का आरोप लगाया है।

कांग्रेस अल्पसंख्यक विभाग के प्रदेश चेयरमैन शाहनवाज़ आलम ने जारी बयान में कहा है कि जब मृतक रिज़वान ख़ुद मरने से पहले अपने परिजनों से बता चुका है कि उसे पुलिस ने पीटा था तब भी पुलिसकर्मियों के ख़िलाफ़ मुकदमा न लिखना पुलिस द्वारा इस मामले को दबाने के आपराधिक षड्यंत्र को दर्शाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि लॉक डाउन तोड़ने के बहाने पुलिस को ऊपर से आदेश है कि वो ज़्यादा से ज़्यादा मुसलमानों को पीटे और पकड़े ताकि साम्प्रदायिक मीडिया के ज़रिए ये प्रचारित किया जा सके कि मुसलमान लॉकडाउन का उनलंघन करते हैं और उनके ख़िलाफ़ आम बहुसंख्यक समाज के लोगों के बीच संघ और भाजपा के कार्यकर्ता मुसलमानों के ख़िलाफ़ हिंसा के लिए माहौल तैयार कर सकें।

शाहनवाज़ आलम ने कहा कि इसी साम्प्रदायिक रणनीति के तहत अपने घर से बाहर बिस्किट खरीदने निकले 20 वर्षीय रिज़वान को छज्जापुर थाने के पुलिसकर्मियों ने बुरी तरह पीटा जिससे दूसरे दिन उसकी ज़िला अस्पताल में मौत हो गयी। पोस्टमॉर्टम में आई 4 गंभीर चोटों को दबाने के लिए ही पुलिस ने उसके बाइक के एक्सीडेंट होने की झूठी कहानी गढ़ी है और उस पर एक स्थानीय झोला छाप डॉक्टर से बयान दिलवाया है कि उसके पास रिज़वान अपने परिजनों के साथ आया था और वो उसकी चोटों का इलाज कर रहा था। जबकि रिज़वान के घर वाले वायरल वीडियो के ज़रिए ये कह चुके हैं कि न तो रिज़वान के पास बाइक थी और न उसका एक्सीडेंट ही हुआ था और न तो वो कभी इस डॉक्टर के पास ही गए थे। जो साबित करता है कि पुलिस साईकल का पंचर बनाने वाले के ग़रीब के बेटे के हत्या में शामिल अपने पुलिसकर्मियों को बचाने के लिए लगातार झूठ बोल रही है। शाहनवाज़ आलम ने कहा है कि हत्यास्थल पर तैनात सभी पुलिसकर्मियों को हत्या में नामजद कर पूरे मामले की न्यायिक जांच कराई जाए। अगर पुलिस ऐसा नहीं करती है तो कांग्रेस आंदोलन को बाध्य होगी।

रिज़वान हत्या न्यायिक जांच कराई जाए न्याय नही तो होगा आन्दोलन :- शहनवाज़

लखनऊ 20 अप्रैल 2020। कांग्रेस ने टांडा के रिज़वान हत्याकांड में पुलिस पर लीपा पोती कर दोषी पुलिसकर्मियों को बचाने का आरोप लगाया है।

कांग्रेस अल्पसंख्यक विभाग के प्रदेश चेयरमैन शाहनवाज़ आलम ने जारी बयान में कहा है कि जब मृतक रिज़वान ख़ुद मरने से पहले अपने परिजनों से बता चुका है कि उसे पुलिस ने पीटा था तब भी पुलिसकर्मियों के ख़िलाफ़ मुकदमा न लिखना पुलिस द्वारा इस मामले को दबाने के आपराधिक षड्यंत्र को दर्शाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि लॉक डाउन तोड़ने के बहाने पुलिस को ऊपर से आदेश है कि वो ज़्यादा से ज़्यादा मुसलमानों को पीटे और पकड़े ताकि साम्प्रदायिक मीडिया के ज़रिए ये प्रचारित किया जा सके कि मुसलमान लॉकडाउन का उनलंघन करते हैं और उनके ख़िलाफ़ आम बहुसंख्यक समाज के लोगों के बीच संघ और भाजपा के कार्यकर्ता मुसलमानों के ख़िलाफ़ हिंसा के लिए माहौल तैयार कर सकें।

शाहनवाज़ आलम ने कहा कि इसी साम्प्रदायिक रणनीति के तहत अपने घर से बाहर बिस्किट खरीदने निकले 20 वर्षीय रिज़वान को छज्जापुर थाने के पुलिसकर्मियों ने बुरी तरह पीटा जिससे दूसरे दिन उसकी ज़िला अस्पताल में मौत हो गयी। पोस्टमॉर्टम में आई 4 गंभीर चोटों को दबाने के लिए ही पुलिस ने उसके बाइक के एक्सीडेंट होने की झूठी कहानी गढ़ी है और उस पर एक स्थानीय झोला छाप डॉक्टर से बयान दिलवाया है कि उसके पास रिज़वान अपने परिजनों के साथ आया था और वो उसकी चोटों का इलाज कर रहा था। जबकि रिज़वान के घर वाले वायरल वीडियो के ज़रिए ये कह चुके हैं कि न तो रिज़वान के पास बाइक थी और न उसका एक्सीडेंट ही हुआ था और न तो वो कभी इस डॉक्टर के पास ही गए थे। जो साबित करता है कि पुलिस साईकल का पंचर बनाने वाले के ग़रीब के बेटे के हत्या में शामिल अपने पुलिसकर्मियों को बचाने के लिए लगातार झूठ बोल रही है। शाहनवाज़ आलम ने कहा है कि हत्यास्थल पर तैनात सभी पुलिसकर्मियों को हत्या में नामजद कर पूरे मामले की न्यायिक जांच कराई जाए। अगर पुलिस ऐसा नहीं करती है तो कांग्रेस आंदोलन को बाध्य होगी।



डिस्क्लेमर :इस आलेख में व्यक्त राय लेखक की निजी राय है। लेख में प्रदर्शित तथ्य और विचार से UPTRIBUNE.com सहमती नहीं रखता और न ही जिम्मेदार है
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