रायबरेली 17 जनवरी 2017। उत्तर प्रदेष के रायबरेली जिले मे स्थित इंडियन टेलीफोन इंडंस्ट्रीज ने ग्रामीण क्षेत्रों मे ब्राडबैंड सेवा के उपकरण की पहली खेप आज भारत ब्राडबैंड निगम लिमिटेड को सौंपा ।ं ’’जीपान’’ तकनीक की आधुनिक मषीन उपलब्ध कराने के साथ ही  पिछले एक दषक से काम के अभाव मे बंदी की कगार पर पंहुच चुकी आई टी आई को अब काम के लिए भटकना नही पड़ेगा।  लगभग चार सौ करोड़ के  आर्डर मिलने से यहां अब रोजगार के अवसर भी उपलब्ध होने शुरू हो गये है।
पिछले डेढ़ दषक से काम के लिए भटक रही आईटीआई ने आज अपने प्रोडक्षन की पहली खेप आज भारत ब्राडबैडं निगम लिमिटेड को सौंप दी है। लगभग 55 लाख रू कीमत की इस पहली खेप को सोैंपे जाने के समय आईटीआई के कर्मचारियों की ख्ुाषी देखने लायक थी। हर कोई जिले की  सांसद सोनिया गांधी के प्रति आभार व्यक्त कर  रहा था। उल्लेखनीय है कि यूपीए सरकार के कार्यकाल क अंितम दिनो मे बंदी के कगार पर पंहुच चुकी आईटीआई के जीर्णो़द्धार के लिए सोनिया गांधी ने विषेष रूचि लेकर लगभग 4150 करोड़ रू के रिवाईबल पैकेज की मंजूरी केबिनेट से दिलवाई थी ।जिसके तहत आईटीआई मे आधुनिक उपकरण लगाये जाने , फैक्ट्री को नये सिरे से चालू करने के लिए मैनपावर के साथ ही सभी  देनदारियों को पूरा करने का प्लान था। 2014 मे मिली इस मंजूरी का असर यह रहा कि आईटी आई खुले बाजार मे आकर अपनी पहचान बनाने मे कामयाब रही। ग्रामीण क्षेत्रो मे ब्राडबैंड सेवा उपलब्ध कराने के लिए ’’जीपान’’तकनीक के आधुनिक वर्जन ’’ओ एडं टी’’ की मषीन के उत्पादन के लिए आईटीआई ने टेंडर भरा और उसकी कार्यक्षमता काम आई। पहली बार मे ही लगभग 250 करोड रू का काम मिल गया। कर्मचारियो ने दिनरात मेहनत कर समय से  काम पूरा करने की ठानी और  आज रविवार को लगभग 55 लाख रू लागत की पहली खेप बी वी एन एल को सौंप दिया।  इस अवसर पर आईटीआई के इकाई प्रमुख कृष्णा प्रसाद ने कहा कि मार्च 2017 तक लगभग 125 करोड़ रू का काम पूरा कर लिया जाएगा।  उन्होने कहा कि अब हमे सिर्फ काम ही नही मिलने की उम्मीद है बल्कि अब यहां पर रोजगार के अवसर भी उपलब्ध होंगें । श्री प्रसाद ने कहा कि आने वाले समय मे ओ एफ टी केबिल   का  बड़ा आर्डर मिलने पर कर्मचारियों की भर्ती ष्होगी।  आईटीआई ज्वाईट फोरम के राष्ट्रीय अध्यक्ष वी के शुक्ला  ने इसे रायबरेली आईटीआई के लिए एक सुनहरा अवसर बताते हुए कहा कि पिछले डेढ़ दषक से आईटीआई काम के लिए तरस रही थी । लालफीता साही ने फैक्ट्री को बन्दी के कगार पर लाकर खड़ा कर दिया था। सोनिया गांधी के प्रयासो ंसे ही यह फैक्ट्री आज इस स्थिति मे पंहुची कि जीर्णांे़द्धार के साथ ही फैक्ट्री के कर्मचारियो को काम भी मिलना शुरू हो गया है।



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