सोनिया गांधी और राहुल गांधी की समावेशी नीतियां एक जैसी हो सकती है पर इस बात में कोई गुरेज नहीं हो सकता कि कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी के दरबारी राहुल गांधी के युवा दरबारियों से राजनैतिक समझ में कल भी आगे थे आज भी आगे है।

सोनिया गांधी ने कभी ने सुनी सबकी करी मन की परंतु राहुल लगता है बह जाते है,ऐसा लगता है कांग्रेस के भीतर ही राहुल को निपटाने का षड्यंत्र चल रहा है,और निपटाने वालो में उनकी दूसरी पीढ़ी है जिन्होंने कभी सोनिया की मुखर खिलाफत की थी।

अब जब राहुल ने सरेआम प्रधानमंत्री मोदी के व्यक्तिगत करप्शन की बात की तो जनता को आश्चर्य हुआ और लगा की जरूर कुछ न कुछ है क्योंकि संसद में कोई भी बात या आरोप बिना सत्यापन के नहीं लगाया जा सकता,जनता का एकदम से राहुल गांधी पर विश्वास बढ़ गया।

और वो समस्त विपक्ष के सर्वमान्य नेता बन गए परंतु जिसप्रकार से राहुल गांधी की युवा टोली ने प्रधानमंत्री से मुलाक़ात की वही राहुल ने पोलिटिकल माइलेज खो दिया।
राहुल गांधी से कांग्रेसी ही गलती करवा रहे है क्योंकि वो जानते है राहुल की  उम्र कम है और वो अगर चल निकले तो कम से कम 3 दशक तक तो भारतीय राजनीति का एक चमकता सितारा होंगे।

 कांग्रेस में संघ को पालने वाले जागीरदारी परिवारों की उतनी ही पैठ है जितनी भाजपा में है और वो दोनों पार्टियों में अपनी संपत्ति बचाने के लिये घुमते रहते है पर उनकी लड़ाई कल भी गांधी से है आज भी गांधी से है और गांधी की समावेशी सोच से है।



डिस्क्लेमर :इस आलेख में व्यक्त राय लेखक की निजी राय है। लेख में प्रदर्शित तथ्य और विचार से UPTRIBUNE.com सहमती नहीं रखता और न ही जिम्मेदार है
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