एक तरफ राजनैतिक दलों को पैसे के हिसाब किताब से दूर रखा गया है वहीं दूसरी तरफ नोटबंदी के बाद आम जनता को तमाम कठिनाई से जूझना पड़ी रहा है साथ ही ई-पेमेंट से जनता को दुश्वारियो का सामना करना पड़ा रहा है !
दिल्ली मेट्रो के कार्ड का ₹500 का रिचार्ज। डेबिट कार्ड से भुगतान करने पर ₹14.38 की अतिरिक्त कटौती हो जा रही है । कैशलेस इंडिया के लिए आम जनता को इन त्यागों को कर रही है पर आम जनता कोई राजनीतिक दल तो है नहीं कि वह चाहे जितने पुराने नोट अपने बैंक खातों में जमा करा दे और कोई पूछताछ ही न हो। फिर इस तरह की कटौती का बोझ जनता पर क्यो ? जबकि राजनीतिक पार्टियाँ जवाबदेही से भी बाहर क्यो ?



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