लखनऊ, यूपी चुनाव से पहले भाजपा के इंटरनल सर्वे ने भाजपा नेताओं की नींद उड़ा दी है। नोटबंदी का फैसला अब भाजपा के गले की फांस बनता जा रहा है अगर जल्द कैश की किल्लत दूर नहीं हुई तो उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनावों में भाजपा को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। भाजपा सांसदों ने पार्टी अध्यक्ष अमित शाह के साथ बैठक कर बताया कि अगर 15 जनवरी तक कैश की किल्लत दूर नहीं हुई तो हमें चुनाव में भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। दरअसल, पार्टी अध्यक्ष ने पार्टी सांसदों से नोटबंदी पर फीडबैक मांगा था। इसके बाद बुधवार की शाम 7 बजे से रात 9 बजे तक नई दिल्ली नगरपालिका (एनडीएमसी) के कन्वेन्शन हॉल में उत्तर प्रदेश के भाजपा सांसदों ने पार्टी अध्यक्ष से इस बारे में चर्चा की। सूत्रों ने बताया कि बैठक में पार्टी सांसदों ने कहा कि सर्जिकल स्ट्राइक के बाद पार्टी के पक्ष में जो हवा बही थी वह नोटबंदी के बाद बेअसर होती दिख रही है। सूत्रों ने बताया कि पार्टी अध्यक्ष ने सभी सांसदों को बारी-बारी से सुना लेकिन किसी का कोई जवाब नहीं दिया। हालांकि, उन्होंने यह आश्वासन दिया है कि सांसदों की चिंता से सरकार को अवगत करा दिया जाएगा। बैठक में मौजूद एक सांसद ने बताया कि सांसदों में से करीब-करीब सभी सांसदों ने नोटबंदी के विपरीत परिणामों की चर्चा की। सभी ने कहा कि चुनावों में इससे गलत संदेश जाएंगे। सांसदों ने कहा कि लोग अब अधीर हो रहे हैं। अगर जल्द ही स्थिति सामान्य नहीं हुई, बैंकों में करेंसी नोट की किल्लत कम नहीं हुई तो यह पार्टी के लिए बड़ा झटका होगा। एक अन्य सांसद ने बैठक में कहा कि सर्जिकल स्ट्राइक से लोगों में सरकार के कामकाज के प्रति जबर्दस्त उत्साह था। खासकर युवाओं में सरकार और संगठन के प्रति आकर्षण था लेकिन नोटबंदी के बाद इस उत्साह पर रोक लग गई। हालात ऐसे हैं कि अब ग्रामीण आबादी भी तनाव में जी रही है।



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