युवाओं की बात करने वाली भाजपा ऐसा लग रहा है युवाओं की उम्र ३७ वर्ष मान चुकी है। हाल ही में उत्तर प्रदेश युवा भाजपा  अध्यक्ष के  रूप में शुब्रत पाठक जी की नियुक्ति की गयी। एक तरफ भाजपा युवाओं की बात करती है वहीँ युवा चेहरे की जगह ३७ वर्ष के श्री पाठक की नियुक्ति, भाजपा के दावों को झुठलाते हुए नजर आती है।

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 अगर नेशनल युथ पालिसी की मानें तो युवाओं की उम्र १५-२९ वर्ष मानी गयी  है। लगभग सभी भाजपा नेता अपने भाषणों और लोक लुभावने वादों में युवाओं का जिक्र करते नहीं थकते तो वहीँ जब पद देने की बारी आती है तो तरजीह किसी और को मिल जाती है। वैसे कहें तो इस देश का युवा मंत्रालय संभाल रहे मंत्री विजय गोयल जी का उम्र ६३ वर्ष है, तो ऐसा मानें की युवाओं की पालिसी बुजुर्ग तय करेंगे? एक तरफ जहाँ डिजिटल इंडिया,कैशलेस इकॉनमी की बात हो रही है तो वहीँ युवाओं के प्रति सरकार गैर जिम्मेवार दिख रही है। अब ऐसा समझें की इस सरकार के पास कोई युवा सांसद ही नहीं थे जिन्हें वो मंत्री बना सकते थे या सत्तारूढ़ पार्टी समीकरण पर ज्यादा ध्यान देती है ? देश के आज़ादी के ७२ साल बाद भी न तो आज तक कोई युथ कौंसिल बन पाया न ही युवाओं के लिए कोई ठोस कार्यक्रम। पार्टियां भी युवाओं को वालंटियर की तरह ही इस्तेमाल करती हैं। और उससे ज्यादा न तो तबज्जो दी जाती है न ही भागीदारी मिलती है।
कुछ पार्टियों पर परिवारवाद का आरोप लगता है, परिवार के युवाओं को आगे बढ़ाने  का आरोप झेल रही सपा को देखें तो इसका एक मायने और है, युवा नेता या प्रतिनिधि युवाओं को अच्छे से समझता है और युवा उन्हें अपने आप से जुड़ा मानते हैं। अगर इस देश के  ५२ प्रतिशत वोटर  युवा हैं और उन्हें अपने नेता से कोई जुड़ाव महसूश न हो तो फिर हम यही समझें की ये बस वोट बैंक की राजनीती का हिस्सा हैं? वैसे देखें तो ‘पार्टी विथ डिफरेंस’ का नारा बुलंद करने वाली भाजपा भी कहाँ परिवारवाद से दूर है!! खैर, युवाओं को जब आगे बढ़ाने की बात आती है तो परिवारवाद और अन्य बहाने बना के कन्नी काटने की तैयारी शुरू हो जाती है। अब तो आने वाला वक़्त ही बताएगा की युवा कब जागेंगे।


डिस्क्लेमर :इस आलेख में व्यक्त राय लेखक की निजी राय है। लेख में प्रदर्शित तथ्य और विचार से UPTRIBUNE.com सहमती नहीं रखता और न ही जिम्मेदार है
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