• आज साढ़े तीन वर्ष होने के बाद मोदी सरकार से पूछना जरूरी है कि जिस गुजरात मॉडल में अर्थनीति का बढ़िया सपना दिखाकर बीजेपी सत्ता में आई थी वो पूरा होने की बात तो छोड़िए शुरू भी हुआ क्या?
    आखिर बहुत सी जन कल्याण योजनाओं का बजट कम किया गया।वो अमीरों को दिया गया।
    उन अमीरों ने कितने उद्योग लगाए जिसमें लोगों को रोज़गार मिला?
    हर साल 2 करोड़ रोज़गार देने की बात की थी जबकि मोदी सरकार के आने से अब तक 15 से 20 लाख रोज़गार ही मिला।
    किसान आत्महत्या बढ़ती जा रही है।
    छोटे और मझोले उद्योग को नोटबन्दी और GST के गलत तरीके से अमल करने ने मार दिया।
    आखिर देश का पैसा जा कहाँ रहा है?
    मोदी सरकार में NPA याने बड़े कारोबारियों द्वारा ऋण लेकर ना चुकाने की राशि बढ़ती ही जा रही है।
    ललित मोदी और विजय माल्या ही नहीं सुब्रतो राय सहारा जैसों को प्रश्रय बढ़ता ही जा रहा है।
    भारत देश आर्थिक आपातकाल की तरफ बढ़ रहा है।
    कोंग्रेस को विकल्प बन सत्ता में आना है तो इसका समाधान लोगों के सामने पेश करना होगा।
    सिर्फ मोदी सरकार की निंदा से लोगों में समर्थन नहीं मिलेगा।
    अर्थनीति जो निम्न वर्ग,मध्यम वर्ग,नौकरी वर्ग,युवा,छोटे&मझोले व्यापारी और बड़े उद्योगपति सबके अनुकूल हो।तभी देश समग्र रूप से आगे बढ़ेगा।


डिस्क्लेमर :इस आलेख में व्यक्त राय लेखक की निजी राय है। लेख में प्रदर्शित तथ्य और विचार से UPTRIBUNE.com सहमती नहीं रखता और न ही जिम्मेदार है
SHARE

आपकी प्रतिक्रिया