हैदराबाद। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश व चार अन्य राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले मतदाताओं का ध्रुवीकरण करने के लिए तीन तलाक तथा राम मंदिर के मुद्दे को वह भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के चुनाव प्रचार का मुख्य मुद्दा बना रहे हैं। मोदी द्वारा तीन तलाक के मुद्दे पर बोलने के एक दिन बाद ओवैसी ने यहां संवाददाताओं से कहा कि रचनात्मक मुद्दों पर ध्यान देने के बजाय मोदी वोट लेने के लिए (भाजपा के लिए) मुद्दों के ध्रुवीकरण के बारे में बात कर रहे हैं।

उन्होंने कहा, तीन तलाक का मुद्दा चूंकि सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है, इसलिए मुनासिब होता कि मोदी इस मुद्दे पर न बोलते। घटनाक्रम हालांकि दर्शाते हैं कि भाजपा व मोदी के पास रचनात्मक विचारों की कमी है। हैदराबाद से लोकसभा सांसद ने कहा कि वह जानना चाहते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शासन, भ्रष्टाचार, उत्तर प्रदेश में मुलायम सिंह के परिवार में जारी कलह को क्यों चुनावी मुद्दा नहीं बना रहे।

मोदी व उनकी पार्टी को मुस्लिमों का अपमान न करने की सलाह देते हुए एआईएमआईएम प्रमुख ने कहा कि प्रधानमंत्री उन तथ्यों पर क्यों चुप हैं, जिनकी तुलना मुसलमानों के साथ की गई है। अन्य धार्मिक समुदायों में तलाक व अलग होने की दर अधिक है।

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ओवैसी ने कहा, प्रधानमंत्री यह भूल गए हैं कि साल 2011 की जनगणना के मुताबिक देश में 10 साल या इससे थोड़ी अधिक आयु की शादीशुदा गैर मुस्लिम लड़कियों की संख्या एक करोड़ से अधिक है। उन्होंने कहा कि मोदी को उस पत्र के बारे में बात करना चाहिए, जिसे ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने उत्तर प्रदेश सरकार को मुसलमान परिवार की लड़कियों को कृषि भूमि के वितरण के लिए लिखा है।

सांसद ने कहा, अगर आप मुस्लिम महिलाओं के लिए इतना ही चिंतित हैं, तो पूरे देश में मुस्लिमों को आरक्षण क्यों नहीं दे देते? उन्होंने कहा, ‘देश यह भी जानना चाहेगा कि वह जकिया जाफरी (गोधरा दंगों के बाद मारे गए पूर्व सांसद एहसान जाफरी की विधवा) को न्याय देने की बात क्यों नहीं करते।

सरकार से इस इरादे से कि धर्म निरपेक्षता ही देश की आधारशिला है, से सहमति जताते हुए ओवैसी ने यह जानना चाहा कि सरकार बीफ पर पाबंदी लगाकर, राम मंदिर का मुद्दा उठाकर, अयोध्या में राम म्यूजियम बनाकर तथा उच्च न्यायालय के आदेश के बावजूद महाराष्ट्र में मुसलमानों को आरक्षण देने से इंकार कर धर्मनिरपेक्षता को क्यों कमजोर करने में लगी है।



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