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कुछ टी बी चेनलो पर ,एक परम्परा का वशेष रूप से पालन शुरू हुआ हैं ,आज कल कुछ टी वी एंकर ही तय करते हैं की कौन देशद्रोही हैं और कौन देश प्रेमी ?

रविशजी के एक पुराने साक्षात्कार को देख रहा था ,जिसमे वो सवाल उठा रहे थे की कोई प्राइम टाइम पर अपने आधी घंटे के स्लॉट पर ताई ,कोट पहन कर उंगली दिखा दिखा कर दूसरो को देश द्रोही कहेगा ,जिसने आज तक लोगो की परेशानियों के लिए कभी डिबेट नहीं चलाई ?

कभी देश के लोगों के बीच नहीं गया ?

क्या वो दूसरो को देशद्रोही  कहने वाले ,खुद देशद्रोह का काम नहीं कर रहे ?

अजीब दौर हैं ,अजीब प्रदूषण हैं  क्या शानदार राष्ट्रवाद का खोखला नारा खोखले लोगो के द्वारा ?

हमारे देश का राष्ट्रवाद जर्मनी जैसा नही जिसमे यहूदियों को उठा कर आग की भट्टियो में झोंक दिया गया था । स्वामी नाथन अय्यर जी ने इसके बारे में लिखा हैं, लेकिन कोई उसमे भारतीय उदहारण नहीं ?

आज उस में एक उदहारण जोड़ने का समय आ गया हैं । सन १९४२ में जब कांग्रेस ने अंग्रेजो से भारत छोडो आन्दोलन  की शुरुआत की तब बाबा साहब अंबेडकर अंग्रेजो के साथ थे ।  ब्रिटिश सरकार के अंग थे । राष्ट्रीय स्वयं संघ ने आधिकारिक रूप से भारत छोडो आन्दोलन में भाग लेने से मन कर दिया था । सावरकर भारत छोडो आन्दोलन के खिलाफ थे । कम्युनिस्ट पार्टी भी उस आन्दोलन के विरोध में थी ।

तब क्या कांग्रेस ने इन सबको राष्ट्र विरोधी कहा ?

लेकिन कांग्रेस ने इन सबको अपने साथ रखा सम्मान दिया ।

तब राष्ट्र प्रेम  और राष्ट्रीय अभिव्यक्ति पूरे देश की चरम पर थी ,क्या तब गांधीजी ने इन सबको राष्ट्र विरोधी कहा ?

अगर गांधीजी उस समय जो राष्ट्र के बड़े नेता थे उन्होंने इन सबको राष्ट्रविरोधी कह दिया होता तब शायद संघ कितना भी आज हिन्दू  हिन्दू बोलता गांधीजी के आरोप की कालिख कभी नहीं धुलती ,लेकिन वो गांधी थे इसी लिए वो  आज भी गांधी हैं ।

जब देश आज़ाद हुआ,  नेहरूजी आधी रात को राष्ट्र को पहला संबोधन कर रहे थे । तब देश के बहुत से हिस्सों में समाजवादी ज़लूस निकाल निकाल कर भ्रम फैला रहे थे ,कह रहे थे , की ये आज़ादी झूठी हैं । उनको भी कभी राष्ट्र विरोधी नहीं कहा गया ।

ये हैं भारतीय राष्ट्रवाद ।

अब लगता हैं वही संघ के लोग देश में पश्चिम का राष्ट्रवाद लाना चाहते हैं ,उनको शायद भारतीयता शब्द पसंद नहीं गांधीजी का  राष्ट्रवाद ,नहीं पसंद ?

कभी मुंशी प्रेम चंद ने कहा था ..”राष्ट्रवाद आज के ज़माने का कोढ हैं “  कमल नाथ गोयनका के संकलन में ये निबंध के रूप में संकलित हैं । किसी कथित राष्ट्रवादी को जानकारी लेनी हो तो ले सकता हैं ।

राष्ट्रवाद की परिभाषाये समय और काल के अनुसार बदलती रही जिसने समाज बांटा ,देश बांटा ।

देश भक्ति या राष्ट्रवाद कोई वस्तू नहीं एक भावना  जो  हम सबको एक देश में बांधती हैं ,एक राष्ट्र बनाती हैं राजनैतिक विचारधाराओं  की भिन्नता ,शत्रुता का या नफरत का कारण नहीं हो सकते ।



डिस्क्लेमर :इस आलेख में व्यक्त राय लेखक की निजी राय है। लेख में प्रदर्शित तथ्य और विचार से UPTRIBUNE.com सहमती नहीं रखता और न ही जिम्मेदार है
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