जांच कमेटी पर 45.42 लाख खर्च, रिपोर्ट सार्वजानिक करने की मांग

मुंबई। महाराष्ट्र के पूर्व राजस्व मंत्री एकनाथ खड़से पर पुणे स्थित भोसरी जमीन घोटाले की जांच कर रही कमेटी पर अब तक 45.42 लाख रुपए खर्च किए जा चुके हैं। आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली ने सरकार से झोटिंग कमेटी की रिपोर्ट सार्वजनिक किये जाने और उसकी सिफारिशों पर अमल किये जाने की मांग की है। गलगली ने कहा कि खड़से पर भ्रष्टाचार के जमीन घोटाले के गंभीर आरोप हैं। झोटिंग कमेटी को जनता की कमाई से चुकाए गए टैक्स के पैसे से वेतन दिया गया है। ऐसे में कमेटी की रिपोर्ट को जानने का हक जनता को है।

बता दें कि महाराष्ट्र के विवादित पूर्व राजस्व मंत्री एकनाथ खडसे की भोसरी जमीन मामले की जांच करने के लिए महाराष्ट्र सरकार ने उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश डी.एस. झोटिंग की अगुवाई में कमेटी का गठन किया था। गलगली को आरटीआई के तहत मिली जानकारी के अनुसार झोटिंग कमेटी पर अब तक 45.42 लाख रुपए खर्च किये गए हैं।

गलगली ने महाराष्ट्र सरकार से झोटिंग कमेटी पर हुए खर्च की जानकारी मांगी थी। सामान्य प्रशासन विभाग के अवर सचिव एस.एन. महिरे की दी गई जानकारी के अनुसार झोटिंग के वेतन पर 23 जून 2016 से 15 जुलाई 2017 के दौरान 28,21,126 रुपए वेतन के तौर पर जबकि टेलीफोन, पेट्रोल, अखबार, बिजली, पानी और अन्य खर्चों पर 1.68 लाख रुपए खर्च किये गए हैं। वहीं झोटिंग कमेटी के तहत कार्यरत एक अधिकारी मधुकर चव्हाण के वेतन पर दिनांक 6 अगस्त 2016 से 15 जुलाई 2017 के दौरान 15.55 लाख रुपए खर्च किये गए हैं जिसमें वेतन सहित अन्य खर्च शामिल है।

गलगली ने बताया कि खड़से के खिलाफ जमीन घोटाले में भ्रष्टाचार के आरोपों  की जांच कर रही झोटिंग कमेटी को 3 महीने में अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपनी थी जो कि काफी देर से सौंपी गई। यह रिपोर्ट सरकार को 30 जून 2017 को सौंपी गई। गलगली ने सरकार से झोटिंग कमेटी की रिपोर्ट को सार्वजनिक करके उसकी शिफारिश के अनुसार कार्रवाई की मांग की है। बता दें कि खडसे भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ विधायक हैं जिनका नाम कभी मुख्यमंत्री की दौड़ में सबसे आगे था। उन पर मंत्री रहते पुणे की एमआईडीसी स्थित भोसरी में एक बडेÞ भूखंड को कौड़ियों के दाम अपने सगे संबंधियों को दिए जाने का आरोप लगाया गया है। बतया जा रहा है कि खडसे ने नियमों की अनदेखी करके यह इस जमीन की डील में सहयोग दिया है। हालांकि खड़से अपने ऊपर लगे आरोपों को सिरे से खारिज कर चुके हैं। उन्हें भ्रषटाचार के आरोपों के बाद मंत्री पद से त्याग पत्र देना पड़ा था।



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