ठीक तेरह वर्ष पहले फरवरी 2006 को जन्म हुआ महात्मा गाँधी ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना का , इस योजना को पहली बार प्रायोगिक रूप में 200 गाँवों में शुरू किया गया. यह योजना विश्व में अपने तरह की पहली योजना थी जिसने ग्रामीणों को कम से कम 100 दिन के रोजगार का क़ानूनी अधिकार दिया. सबसे अच्छी बात यह थी की यदि 15 दिन के अन्दर सरकार रोजगार नहीं दे पाती थी तो ग्रामीण को बेरोजगारी भत्ता देना होता था, और भी अच्छा ये था की श्रमिकों की न्यूनतम मजदूरी को उपभोक्ता सूचकांक से जोड़ दिया गया था.
इन्ही सब कारणों से मनरेगा ग्रामीण गरीबों और श्रमिकों के लिए विश्व का सबसे अच्छा और सबसे बड़ा कार्यक्रम बन गया कालांतर में UPA सरकार ने इसकी पहुँच पुरे देश में कर दी. सबसे बड़ा फायदा यह हुआ की इससे न्यूनतम मजदूरी बढ़ गयी और शहरों में पलायन पर भी रोक लगी. समावेशी विकास, रोजगार का अधिकार, श्रमिकों की मर्यादा और सम्मान और ग्रामीण अर्थवयवस्था में इसके योगदान को कई अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं ने भूरी भूरी सराहना की.
मनरेगा का निम्न क्षेत्रों पर बहुत अच्छा प्रभाव पड़ा: जैसे की भू जल का स्तर बढ़ाना, सिंचित क्षेत्र बढ़ाना, पेय जल की उपलब्धि बढ़ाना, भूमि की उर्वरा शक्ति बढ़ाना, भू – क्षरण रोकना, वनिकरण बढ़ाना, पुनर्वनरोपण बढ़ाना इत्यादि.
उपरोक्त तथ्यों से ये सिद्ध है की मनरेगा ने पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीणों के सामाजिक आर्थिक उत्थान में महती भूमिका निभाई है जिसके फलस्वरूप जल संसाधनों की उपलब्धता बढ़ी, मृदा क्षरण कम हुआ, वृक्षावली बढ़ी, आय के स्रोत बढे, पलायन कम हुआ, और सबसे बड़ी बात की बाढ़ हो या अकाल हो हर तरह की परिस्थिति में श्रमिकों को दो जून की रोटी सम्मान से प्राप्त हुई.
इन सफल तरह वर्षों के लिए मनरेगा के शिल्पी श्रीमती सोनिया गाँधी, डॉ मनमोहन सिंह, श्री राहुल गाँधी, श्री रघुवंश प्रसाद सिंह, श्री जयराम रमेश और UPA सरकार साधुवाद के पात्र हैं.

डॉ राधेश्याम राय



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