रतन टाटा ने होलकरों के दरबार में अपना व्यापर बचने के लिए आज पेशी देनी पड़ी कुछ समय पहले रतन टाटा असहिष्णुता के खिलाफ बहुत बढ़ चढ़ कर बोले तब संघ परिवार ने उन पर काफी आँखे तरेरी परंतु चंदे की चाह में कुछ नहीं कर पाए सायरस मिस्त्री को हटाने के बाद रतन टाटा एक चक्रव्यूह में बस गए है जिसमे टाटा संस में काफी हिस्सेदारी तो मिस्त्री की कंपनी की है परंतु उसके बाद काफी हिस्सेदारी स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया ,जीवन बीमा निगम,यूटी के पास है और मिस्त्री को हटाने के लिए और टाटा संस पर पूर्ण नियंत्र करने के लिए सरकार की जरुरत है और सरकार संघ के रिमोट कण्ट्रोल से चलती है इसीलिए रतन टाटा मोहन भगवत से मिले



डिस्क्लेमर :इस आलेख में व्यक्त राय लेखक की निजी राय है। लेख में प्रदर्शित तथ्य और विचार से UPTRIBUNE.com सहमती नहीं रखता और न ही जिम्मेदार है
SHARE

आपकी प्रतिक्रिया