बालाकोट सर्जिकल स्ट्राइक के बाद जहाँ एक तरफ हमारा देश हमारे वायुसैनिको द्वारा दिखाए गये अदम्य साहस और शौर्य के लिए उनकी पीठ थप थपा रहा था एवं विंग कमांडर अभिनन्दन की सुरक्षित वापसी की कामना कर रहा था , वहीं दूसरी तरफ हमारा गोदी मीडिया युधोंमाद एवं मोदी सरकार की अंध मोदी भक्ति में डूबा हुआ था .बालाकोट सर्जिकल स्ट्राइक के बाद बहुत ही सुनियोजित तरीके से गोदी मीडिया देश भक्ति के आड़ में सरकारी प्रोपगैंडा और नफरत परोस रहा था .

बालाकोट सर्जिकल एयर स्ट्राइक्स के बाद नरेंद्र मोदी से लेकर येदुर्र्प्पा तक भाजपा के विभिन्न राष्ट्रिय और शेत्रिय स्तर के नेताओं ने विभिन्न चुनावी रैलियों में अपने भाषणों , पोस्टर और बैनर के माध्यम से इस सैन्य कारवाई का जमकर राजनीतीकरण किया गया, येही नहीं विभिन्न न्यूज़ चैनलों पर भी भाजपा के प्रवक्ताओं ने अपनी जहरीली बदज़ुबान से विपक्ष को और देश के बुद्धिजीवि तबके को राष्ट्रवाद की आड़ में जमकर कोसा और उन्हें देशद्रोही घोषित करने में कोई कसर नहीं छोड़ी . इसी बहस , भसड़ और नफरती उन्माद के बीच इंडिया टुडे के ऑनलाइन ट्विट्टर पोल ने भाजपा के तथाकथित राष्ट्रवाद की पोल खोल कर रख दी . इस सोशल मीडिया सर्वे में पूछा गया की – बालाकोट सर्जिकल एयर स्ट्राइक्स पर कौन राजनीती कर रहा है ?. ट्विटर पर आयोजित इस सोशल मीडिया पोल/सर्वे में एक लाख छप्पन हज़ार से भी अधिक यूज़र्स ने हिस्सा लिया और इस ट्विटर पोल/सर्वे के परिणाम काफी चौकाने वाले थे और भाजपा के लिए ये परिणाम काफी निराशाजनक रहे .

इस ऑनलाइन सोशल मीडिया सर्वे में 52 फीसदी लोगो ने या माना यानि की 81228 यूज़र्स ने इस बात को स्वीकार किया की भाजपा बालाकोट सर्जिकल एयर स्ट्राइक्स को लेकर राजनीती कर रही . वहीँ केवल 38 फीसदी लोगो ने माना की कांग्रेस इस विषय पर राजनीति कर रही है और 10 प्रतिशत लोगो ने कहा की दोनों राजनैतिक दल इस विषय पर राजनीति कर रहे हैं . इस ऑनलाइन सोशल मीडिया ट्विटर पोल/ सर्वे के परिणामो से स्पष्ट ही की देश की जनता का एक बहुत बड़ा तबका इस विषय पर भाजपा द्वारा किए जा रहे राजनैतिक करण को कभी भी स्वीकार नही करेगा .

पर बड़े ताज्जुब की बात है की इतने बड़े ट्विटर सर्वे /पोल को इंडिया टुडे ने ना तो प्रमुखता से कहीं छापा और ना ही कहीं प्रमुखता से प्रकाशित किया .सवालों के घेरे में अब सिर्फ मोदी सरकार नहीं बल्कि इंडिया टुडे जैसे बड़े मीडिया घराने भी है जो कभी अपनी निष्पक्षता और निर्भीक पत्रकारिता के लिए जाने जाते थे परन्तु आज सिर्फ सरकार की चाटुकारिता के लिए जाने जाते है . क्या प्रजातंत्र का चौथा स्तम्भ सरकार के सामने घुटने टेक चुका है ? खैर इस घुटने टेक चुके चौथे स्तम्भ के लिए एक कविता ….

सरकार बनाने बिगाड़ने की बात है करता

सिस्टम सुधारने की दम है रखता

दीवानगी की हदों को पार है करता

कलम कैमरे से प्रहार है करता

कभी दंगो में कभी बलवो में

खबर पाने की फ़िक्र में

जनता को सच दिखलाने की जिद में
अपनी फ़िक्र जो नहीं है करता
धन से वंचित वह है रहता
सरस्वती की पूजा है करता
बुद्धिजीवी वह है कहलाता
अभावग्रस्त जीवन वह जीता
चौथे स्तम्भ की संज्ञा वो है पाता
सर्वनाम होकर रह जो जाता
पत्रकार वह है कहलाता………..


डिस्क्लेमर :इस आलेख में व्यक्त राय लेखक की निजी राय है। लेख में प्रदर्शित तथ्य और विचार से UPTRIBUNE.com सहमती नहीं रखता और न ही जिम्मेदार है

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