नई दिल्ली। स्वराज इंडिया के अध्यक्ष योगेंद्र यादव ने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों को स्थायी करने की मांग के साथ अनशन पर बैठे कर्मचारियों के समर्थन में बनारस के सांसद नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखा है। योगेन्द्र ने बीएचयू में तीन दशकों से काम कर रहे दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों के साथ हो रहे अन्याय के प्रति चिंता जताई तथा इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए जल्द से जल्द कार्रवाई करने का आग्रह किया।

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योगेंद्र ने पत्र में लिखा है, यूनिवर्सिटी परिसर में इस तरह के शोषण की घटना सुनकर दु:ख होता है। विश्वविद्यालय वह जगह होती है, जहां राष्ट्र निर्माण का काम होता है, देश का भविष्य बनता है। यहां विद्यार्थियों को सिर्फ शिक्षा नहीं दी जाती, बल्कि उनमें मानव मूल्यों का निर्माण भी किया जाता है। बीएचयू तो देश के कुछ गिने-चुने विश्वविद्यालयों में से है, जिसने राष्ट्र निर्माण में काफी योगदान दिया है।

योगेंद्र ने लिखा है, महामना मदन मोहन मालवीय के सपनों का यह विश्वविद्यालय देश के लिए एक नजीर रहा है। अगर ऐसे विश्वविद्यालय में ही मजदूरों का शोषण होता है तो छात्र क्या सीखेंगे? विश्वविद्यालय तो हर तरह के शोषण के खिलाफ आवाज उठाता है। आज विश्वविद्यालय परिसर ही शोषण का उदाहरण बन गया है। यह बहुत ही चिंतनीय है।

ज्ञात हो कि पिछले चार महीनों से दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी बीएचयू प्रांगण में अनशन पर बैठे हैं और 30 दिनों तक आमरण अनशन पर भी बैठे रहे परंतु प्रशासन के कान पर जू नहीं रेंगी। आमरण अनशन के पश्चात भी जब प्रशासन की तरफ से कोई सुनवाई नहीं हुई, तब कर्मचारियों ने राष्ट्रपति को पत्र लिखकर इच्छा मृत्यु की अनुमति मांगी।

योगेंद्र ने पत्र के माध्यम से बनारस के सांसद से निवेदन किया है कि वह इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए जल्द से जल्द उचित कार्रवाई करें, ताकि पिछले तीन दशक से इस संस्था को सींचने वाले इन कर्मचारियों के साथ अन्याय न हो और विश्वविद्यालय प्रशासन में लोगों का विश्वास बहाल हो सके।

इस अन्याय के विरोध में यूथ फॉर स्वराज स्थानीय सामाजिक संगठनों के साथ मिलकर दिवाली के दिन एक घंटे तक लाइट बंदकर विरोध दर्ज करेगा। इस अभियान में सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया), एनएपीएम और गुमटी व्यवसायी कल्याण समिति यूथ फॉर स्वराज का सहयोग कर रहे हैं।



डिस्क्लेमर :इस आलेख में व्यक्त राय लेखक की निजी राय है। लेख में प्रदर्शित तथ्य और विचार से UPTRIBUNE.com सहमती नहीं रखता और न ही जिम्मेदार है
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