पुलवामा के बाद देश मे छिडी चर्चा के बीच युवा विधायक रितेश पाण्डेय ने प्रधानमंत्री को घेरते हुए बेबाकी से अपनी बात सोशल मीडिया के माध्यम से रखी रितेश लिखते है…..

देश की सुरक्षा के प्रति चिंतित हर नागरिक के मन में यह प्रश्न उठ रहा है कि हमारे प्रधानमंत्री पूरे देश के प्रधानमंत्री हैं या सिर्फ भाजपा के चुनाव प्रचारक। यह दुनिया भर में स्थापित तथ्य है कि जब कोई देश का प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति चुन लिया जाता है, तो उसकी मुख्य जिम्मेदारी पूरे देश के हितों की रक्षा होती है, न कि सिर्फ 24 घंटे इस काम में लगे रहना कि प्रधानमंत्री की पार्टी कैसे चुनाव जीते और वे कैसे वह अगला प्रधानमंत्री बने।

यह सवाल पुलवामा हमले और उसके बाद प्रधामंत्री मोदी जी कारगुजारियों के बाद से जोर-शोर उठने लगा।रक्षा मामलों के अधिकांश विशेषज्ञ यह कह रहे हैं कि यदि इंटेलीजेंस की सूचनानाओं पर समय रहते ठीक से ध्यान दिया गया होता, तो पुलवामा हमले को रोका जा सकता था। इस हमले में हमारे देश के 40 जवान शहीद हो गए। जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल ने यह सार्वजनिक तौर पर स्वीकार किया कि इंटलीजेंस की सूचना थी और समय रहते कार्यवाही करने में हमसे चूक हुई। हम सभी को पता है कि जम्मू-कश्मीर में इस समय केंद्र का शासन है। यह सूचना प्रधान को भी जरूरी ही दी गई होगी।

हम सभी को पता है कि पुलवामा हमले को दौरान और उसके बाद भी प्रधानमंत्री फोटोशूट करवाते रहे। प्रधामंत्री कार्यालय से यह सफाई पेश की गई कि नेटवर्क नहीं मिल रहा था, जिसके चलते प्रधानमंत्री को समय से सूचना नहीं मिल पाई। कोई भी तथ्य को मानने को तैयार नहीं है।

पुलवामा हमले का बाद जब पूरा देश शोक में डूबा हुआ था, तब प्रधानमंत्री जी चुनावी रैलिया कर रहे थे और निरंतर कपड़े बदल रहे थे। हद तो तब हो गई जब इस देश का एक जाबांज पायलट अभिनंदन पाकिस्तान के कब्जे में था और प्रधानमंत्री देश को मजबूत करने की जगह बूथ मजबूत कर रहे थे।

सच यह है कि पुलवामा हमले के बाद देश में पैदा हुए आक्रोश और पाकिस्तान के प्रति नफरत को प्रधानमंत्री जी और उनकी पार्टी चुनावी सफलता के लिए भुनाने में लग गए हैं। देश के लोगों के भीतर पैदा हुआ देशभक्ति की भावना का इस्तेमाल प्रधानमंत्री जी और उनकी पार्टी हर मोर्चे पर पांच सालों की असफलता को ढंकने के लिए कर रही है। भाजपा के वरिष्ठ नेता यदुरप्पा ने तो खुलेआम यह कह भी दिया कि पुलवामा हमले और पाकिस्तान पर एयर स्ट्राइक के चलते भाजपा के पक्ष में लहर पैदा हुई है, अब हम कर्नाटक में 22 लोकसभा सींटे जीत लेगें।

सच्चाई यह है कि प्रधानमंत्री और उनकी पूरी कैबिनेट चुनाव जीतो अभियान में लगी हुई है। इस अभियान में देश हित की रक्षा के लिए बनी संस्थाओं और नियुक्त व्यक्तियों को भी शामिल कर लिया गया है। हमारे राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल देश के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाकारकार कम भाजपा के चुनावी प्रचार की रणनीति के हिस्सा ज्यादा बनते दिखाई दे रहे हैं।
सेना के भीतर से भी यह आवाज आ रही है, उसका इस्तेमाल राजनीति के लिए किया जा रहा है। कई रिटायर्ड जनरलो ने इस पर गंभीर चिंता जताई है।

सच यह है कि पुलवामा हमला और पाकिस्तान पर एयर स्ट्राइक के बाद भाजपा के भीतर एक खुशी और उत्साह की स्थिति है। उन्हें लग रहा है कि यह सबकुछ उनकी चुनावी नैया पा लगा सकता है। उनके हारने की संभावना को कम कर सकता है। प्रधानमंत्री जी भी इसके सहारे फिर से प्रधानमंत्री बनने का स्वप्न देखने लगे हैं। लेकिन देश की जनता उनका यह स्वप्न पूरा नहीं होने देगी, क्योंकि वे कोई भी वादा पूरा नहीं कर पाए, जिन वादों के आधार उन्होंने 2014 में वोट मांगा था और देश की जनता ने उन्हें उनके वादों पर भरोसा करके वोट दिया था।
देश की सुरक्षा के मोर्चे पर भी प्रधानमंत्री जी पूरी तरह असफल रहे है, क्योंकि उन्होंने पिछले पांच सालों में देश के प्रधानमंत्री के रूप में नहीं, बल्कि भाजपा के प्रचारक के रूप में काम किया। पुलवामा हमले के बाद और आज भी वे यही कर रहे हैं।

जो प्रधानमंत्री देशहित और देश की सुरक्षा की चिंता की जगह अपने प्रधानमंत्री बनने की चिंता सर्वाधिक करता हो, उसके हाथों में देश सुरक्षित नहीं रह सकता और न ही वह देश हित कर सकता है।

हमारे प्रधानमंत्री के लिए सबकुछ चुनाव जीतों अभियान का हिस्सा है। हमें ऐसा प्रधानमंत्री नहीं चाहिए।



डिस्क्लेमर :इस आलेख में व्यक्त राय लेखक की निजी राय है। लेख में प्रदर्शित तथ्य और विचार से UPTRIBUNE.com सहमती नहीं रखता और न ही जिम्मेदार है

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