फाइले फडफडा रहे है फिईलें सवाल पे सवाल पूछे जा रही है राफ़ाल की नब्ज़ कभी सरकार के हाथों कभी समाचार के जरिये बहार आ जा रही है | अभी आकाश में राफ़ाल ने उड़ना शुरु नही किया है | उसके फाइलों के पन्ने बोलने लगे है | द हिन्दू समाचार की प्रतिक्रिया से लगा कि आज राफ़ाल की सारी खबरे जन जन को पता चल जाएँगी | चुकीं कुछ खबरे है बहार आ पाई | एन राम मूल प्रश्न ये उठाते है की “रक्षा मंत्री, रक्षा सचिव और रक्षा सौदों के ख़रीद के लिए बनी टीम को ये पता ही नहीं चला की प्रधान मंत्री का ऑफिस फ्रांस देश से राफ़ाल पर अपने अस्तर पे बात कर रहा है” तो फिर रक्षा टीम क्या करने के लिए है झुनझुना बजाने के लिए |
नोटिंग में रक्षा सचिव कहते है की “अगर प्रधान मंत्री ऑफिस को भरोसा नही है तो रक्षा सौदों के ख़रीद के लिए अपनी नयी टीम बना ले, ये बात जाहिर है की जो टीम पिछले कई सालों से काम कर रही है, अचानक टीम को बताये बिना या भंग किये बिना दूसरा टीम सक्रिय हो जाये तो, जाहिर सी बात टीम के कप्तान को बुरा लगेगा ही, इसका विरोध करने वाले ये भी बताये की मनोहर परिकर जैसे रक्षा मंत्री, रक्षा खरीद के लिए बनी टीम, उसके चीफ एयर मार्शल एस बी पी सिन्हा”, टीम से ऐसा कौन सा काम नही हो रहा था जो कि प्रधान मंत्री ऑफिस को बीच में आना पड़ा | क्या कहेंगे इसे ?
रक्षा मंत्री, रक्षा सचिव और रक्षा सौदों की बनी टीम ने कहा था की हमसे ये काम नहीं हो पा रहा है, ये काम प्रधान मंत्री ऑफिस आप कर दीजिए | इस राफ़ाल की खरीद के लिए जो टीम बनाया गया था उसके हेड एयर मार्शल एस बी पी सिन्हा थे | और फ़्रांस में भी एक टीम बनी जिसके के हेड जनरल रैब थे | 24 नवम्बर 2015 रक्षा मंत्रालय एक नोट जारी करता “उसमें ये लिखा जाता है की हमे प्रधान मंत्री ऑफिस को ये सुझाव देना चाहिए कि कोई भी ऑफिसर खरीद या मोलभाव के लिए बनी टीम है, जो टीम का मेम्बर नहीं है सामानांतर रूप से फ़्रांस सरकार से बात चित ना करें, इससे टीम पर बुरा असर पड़ता है ” फिर ये प्रश्न उठता की प्रधान मंत्री ऑफिस पर रक्षा मंत्री, रक्षा सचिव और रक्षा सौदों की बनी टीम को भरोसा नही है | तो इस तरह से प्रधान मंत्री ऑफिस एक उचित व्योस्था बना ले | ये खीचड़ी रोज़ रोज़ अच्छी नहीं लगती सिवाए एक के |
रक्षा सचिव कड़ी टिप्पणी करते है “की उम्मीद की जाती है कि प्रधान मंत्री ऑफिस इस तरह की चर्चा ना करें क्योकि हमारें टीम की स्थिती कमजोर हो जाती है ” फिर ये प्रश्न आता है क्या सरकार ने सर्वोच्च न्यालय को दिए गए जबाब में ये बताया है की इस डील में पीएमओ भी सामिल था | जिसकी इनफार्मेशन रक्षा मंत्रालय को नही था |
फ्रांस के प्रेसिडेंट ओलएंड और इंडिया के प्रधानमंत्री मोदी इस डील पे करार करते हैं 10 अप्रैल 2015 को पेरिस में डील होता है और इसके बाद 23 सितम्बर 2015 दोनों देशों के बीच में MoU होता है, उसके एक महिने बाद 23 अक्टूबर 2015 फ्रांस के जनरल स्टेफेन रैब के लेटर से पता चलता है | पीएमओ के संयुक्त सचिव जावेद असरफ और फ्रांस के रक्षा मंत्रालय डिप्लोमेट सलाहकार लुइ से फ़ोन पे वार्तालाप हुआ था | और इसकी भनक भी फ्रांस से पता चलता है न की इंडिया से | क्या संयुक्त सचिव जावेद असरफ अपने लेवल पे बात किये या किसी के कहने पे बात किये | फिर भी जावेद असरफ ये बात साफ़ कह देते हैं की उनकी फ्रांस की डिप्लोमेट सलाहकार लुइ से बात हुई है | कहते है की फ्रांस के प्रेसिडेंट के सलाह पे बात हुई थी |
21 सितम्बर 2018 एसोसिएट प्रेस में ओलंदे ने कहा की मोदी सरकार में आने के बाद नया आईडिया बना लेते है | उसी में चर्चा के दौरान रिलाइंस ग्रुप का नाम आता है | 2015 नवम्बर की नोट में लिखा है की इस तरह मोलभाव करने से भारतीय टीम की कैपेसिटी कम होती है | फ्रांस को इससे लाभ मिल सकता है, और यही इस केस में हुआ है | रक्षा मंत्रालय और राफ़ाल खरीद की टीम काफी टाइम से इस कोशिश कर रही थी की फ्रांस सरकार अपने अस्तर पर गारंटी देदे या फिर बैंक गारेंटी देदे, रक्षा मंत्रालय इस बात पे एतराज जताता है बिना बैंक के गारेंटी या संप्रभु गारेंटी के ही डील हो रही है, बस लेटर ऑफ़ कम्फर्ट जरी हो जाता है |
कांग्रेस पार्टी के हेड कहते है की “मोदी ने देश की जनता के तीस हजार करोड़ रुपये चुराकर रिलाइंस को दिए है” बीजेपी की पर्तिक्रिया में “बीजेपी ने इसको मरा हुआ घोडा बोला” निर्मला सीतारमण ने कहा की समाचार पत्र ने केवल आधा मुद्दा ही छापा है| सरकार जो केवल बंद लिफाफे में सुप्रीम कोर्ट को ही इनफार्मेशन दिखाना चाहती थी लेकिन वो एन ई ऐ द्वरा इनफार्मेशन बाहर कर रही है |



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