फ़िरोज़ाबाद की चूड़ी पूरे देश में प्रसिद्ध है और फ़िरोज़ाबाद के ९० प्रतिशत जनता के जीवोकापार्जन का साधन है। वहीँ चूड़ी उद्योंग से जुडे कारीगरों और मजदूरों के हालात नोटबंदी की वजह से प्रभावित हो रहे हैं । इसकी वजह से बंद होने वाले चूड़ी फैक्टरियों की संख्या बढ़ती जा रही है।
मजदूरों का कहना है कि पैसे की कमी की वजह से समय पर पैसे नहीं मिल रहे हैं, अगर मिल भी रहा है तो बाजार में २००० रुपये के खुलले की कमी की वजह से काम नहीं हो पा रहा है . मजदूरों की कमी की वजह से या तो फैक्टरियां बंद कर दी गयी हैं या चूड़ियों के उत्पाद में कमी आयी है।  एक रिपोर्ट के मुताबिक़ अब तक लगभग ९० प्रतिशत चूड़ियों के फैक्ट्री बंद हो चुके हैं।  शादी के समय में जहाँ चूड़ी उद्योग में चार चाँद लग जाते थे वहीँ शादी के इस मौसम में लोग विदेशी या महंगी चूड़ियां खरीदने को मजबूर हैं।  २०० रुपये डिब्बा बिकने वाले चूड़ी पांच पांच सौ तक बिक रही है।  फैक्टरियों में एक दिन का खर्च लगभग २००००० रुपये है लेकिन बैंक से मात्र १०००० -१५००० रुपये ही दिए जा रहे हैं. बाहर के शहरों से आये मजदुर भी अपने घर को लौटने को मजबूर हो गए हैं ।


डिस्क्लेमर :इस आलेख में व्यक्त राय लेखक की निजी राय है। लेख में प्रदर्शित तथ्य और विचार से UPTRIBUNE.com सहमती नहीं रखता और न ही जिम्मेदार है
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