यूपी ही नहीं देश की सियासत में यादव परिवार का तीन दशक से दखल रहा। लेकिन पिछले एक साल से सपा के घर की कलह से यहां कार्यकर्ताओं में काफी रोष है तो वहीं टीपू की चाची काफी निराश। एक जनवरी 1981 में दुबले-पतले अखिलेश यादव को ठंड़ लग गई थी। उन्हें बुखार ने जकड़ लिया और अखिलेश बेहोश हो गए तो चाची रात में उन्हें गोद में लेकर पैदल ही अस्पताल की तरफ एडमिट कराने के लिए चल पड़ीं। इतना ही नहीं नेता जी अधिकतर रातनीति के चलते बाहर रहते थे तो टीपू की देखरेख चाची सरला किया करती थीं। दो साल तक चाची ने घर में ही पाठशाला खोलकर अखिलेश यादव को हिन्दी और अंग्रेजी में दक्ष बनाया। सैफई निवासी शिवरतन सिंह यादव ने बताया कि राजनीति की बारिकियां चाचा शिवपाल यादव ने सिखाई हैं। सीएम को चाचा के साथ राजनीति नहीं करनी चाहिए। पार्टी खड़ी करने के साथ ही अखिलेश यादव को राजनीति में लाने में शिवपाल का अहम योगदान रहा है।

सरला के चलते बोलते हैं फर्राटेदार अंग्रेजी -पिता मुलायम सिंह यादव जब राजनीति में घनघोर व्यस्त रहा करते थे तो अखिलेश की घर और स्कूल की पढ़ाई की देख-रेख शिवपाल और उनकी पत्नी सरला ही करती थीं। राजनीति के बीहड़ों में लड़ते हुए जब मुलायम सिंह की जान तक को ख़तरा था तो उन्होंने तब अपने एक मात्र पुत्र अखिलेश को सुरक्षा कारणों से स्कूल से निकाल कर घर बैठा दिया था। इसी दौरान चाची उन्हें 1980 से 1982 तक घर पर पढ़ाया करती थीं । सरला यादव अंग्रेजी से एमए किए हुए हैं और उन्होंने टीपू को अंगेजी में दक्ष बनाया है।

जेठानी की भी की सेवा- अखिलेश यादव की मां मालती देवी अक्सर बीमार रहती थीं तो उनकी देखरेख चाची सरला ही किया करती थीं। शिवरतन ने बताया कि 1983 में जब अखिलेश को धौलपुर मिलिट्री स्कूल में भर्ती कराया गया तो चाचा शिवपाल ही उन्हें इटावा से वहां लेकर गए थे। भर्ती की सारी औपचारिकताएं शिवपाल ने पूरी कीं क्योंकि मुलायम को फ़ुर्सत नहीं होती थी। स्कूल में अखिलेश के गार्जियन शिवपाल और सरला यादव थे। चाचा-चाची ही अखिलेश से मिलने धौलपुर जाया करते थे। शिवपाल के सक्रिय राजनीति में चले जाने से चाची मैसूर के इंजीनियरिंग कॉलेज में अखिलेश से मिलने जाया करती थीं। चाची सरला अपने टीपू के मनपसंद आटा और खोए के लड्डू ले जाया करती थीं। इतना ही नहीं चाची ने अखिलेश यादव को सपा के गठन की जानकारी फोन के जरिए दे दी थी।

चाची ने डिम्पल से करवाई थी शादी -अखिलेश पढ़ाई पूरी करके आस्ट्रेलिया से लौटे और उस साल अपनी गर्लफ्रेंड के बारे में चाची को बताया। चाची ने चाचा शिवपाल को अखिलेश और डिम्पल की दोस्ती के बारे में जानकारी दी। शिवपाल ने नेता जी से इन दोनों की शादी कराए जाने का अग्रह किया, लेकिन वह नहीं माने। तब चाची सरला ने नेता जी से पहली बार कुछ मांगा, जिसे वह इंकार नहीं कर सके और 1999 में डिम्पल से उनकी शादी कर दी गई। कन्नौज सीट से चुनाव जीत कर वे लोक सभा पहुंच गए। उसी के बाद अखिलेश ने राजनीति और समाजवादी पार्टी की गतिविधियों में दिलचस्पी लेना शुरू किया।

सेना में जाना चाहते थे अखिलेश यादव -एनडीए के जरिए सेना में अफसर बनकर देश की सेवा करना चाहते थे। लेकिन चाची को यह मंजूर नहीं था। वह अखिलेश को बिजनस के साथ ही राजनीति में लाने के लिए पति शिवपाल से अक्सर कहा करती थीं। मुलायम अपने इस सबसे छोटे भाई पर बहुत भरोसा करते रहे। उन्हें अघोषित रूप से अपना वारिस मानते रहे। इसी दौरान शिवपाल ने 1999 में उन्हें कन्नौज से चुनाव लड़वाया और जितवाया। अखिलेश भी चाचा शिवपाल का बहुत सम्मान करते थे।



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