उत्तर प्रदेश के ताजा घटनाक्रम पर अगर विस्तार पूर्वक देखें तो कहीं न कहीं रामगोपाल यादव जी अहम भूमिका में दिख रहे हैं। ऐसा भी प्रतीत होता है कि अखिलेश यादव जी अपने चाचा रामगोपाल जी के इशारे पर काम कर रहे हैं। हालिया घटनाक्रम भी यही दर्शाता है, वहीँ कुछ पिछले मामले को देखें तो यादव सिंह का निलंबन वापस लेना और रामगोपाल जी का यादव सिंह कनेक्शन किसी से छुपा नहीं है।

ज्ञातव्य हो की अक्षय ने सितंबर 2013 में एनएम बिल्डवेल कंपनी के 9 हजार 995 शेयर यादव सिंह के सहयोगी राजेश मनोचा से दस रुपये के भाव पर खरीदे थे। पांच शेयर अक्षय की पत्नी ऋचा के नाम स्थानांतरित हुए थे। उस समय इस कंपनी के शेयर की कीमत लगभग 2050 रुपये होनी चाहिए थी।इसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने यादव सिंह को नोएडा अथॉरिटी में बहाल कर दिया था। यादव सिंह के घर से साल 2014 नवंबर में केंद्रीय जांच एजेंसी सीबीआइ ने दस करोड़ उनकी ऑडी कार से बरामद किये थे। कार राजेश मनोचा की बताई गई थी.

वहीँ मामला ये भी है कि रामगोपाल जी कुछ भाजपा  वरिष्ठ नेताओं से मिल कर अपने पुत्र को  सीबीआई से बचाने के लिए पैरवी कर चुके हैं। तो क्या ऐसा माना जाए की रामगोपाल और भाजपा के बीच कुछ ऐसा डील हुआ था जिसमें सपा को कमजोर करने की जिम्मेवारी भाजपा की ओर से रामगोपाल जी को सौंपी गयी थी? अगर पूरे मामले पर नजर डालें तो पार्टी को चुनाव के नजदीक आने पर क्यों तोड़ा गया? कहीं ये पार्टी को कमजोर करने की कोई बड़ी साजिश तो नहीं थी? खैर!! जो भी हो ये तो वक़्त ही बताएगा।



डिस्क्लेमर :इस आलेख में व्यक्त राय लेखक की निजी राय है। लेख में प्रदर्शित तथ्य और विचार से UPTRIBUNE.com सहमती नहीं रखता और न ही जिम्मेदार है
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