झांसी. 7 जून, 2015 को झांसी रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म पर नवनिर्मित एस्केलेटर का उद्घाटन झांसी की सांसद और केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने किया था। उद्घाटन के ही दिन एस्केलेटर कुछ घंटो बाद बंद हो गया था। किसी तरह इसे सुधार कर चालू किया गया, लेकिन तब से लेकर अब तक यह अक्सर ख़राब ही रहता है। यात्रियों की सुविधा के नाम पर लगाया गया यह एक्सेलेटर केवल शोपीस बनकर रह गया है। यह एक्सेलेटर इसलिये भी शोपीस माना जा रहा है क्योकि सिर्फ एक ही प्लेटफार्म पर इसे लगाया गया है और बाकियों पर सामान्य सीढियां है।

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दिखाने के लिए लगाया गया एस्केलेटर!
झांसी रेलवे स्टेशन पर भारी भरकम बजट के साथ स्वचालित सीढियां सिर्फ इसलिए लगाई गई हैं कि स्टेशन पर आने वाले यात्री इसके दर्शन कर सकें। बिना किसी योजना के तैयार किया गया यह एस्केलेटर रेल महकमे की मंशा और कार्यशैली की पोल खोलता नजर आ रहा है। जिस एस्केलेटर को झांसी स्टेशन पर लगाया गया है उसके संचालन में बाधा आने पर तकनीकि जानकार को बाहर से बुलाया जाता है। एक सवाल और खड़ा होता है कि एक प्लेटफार्म पर चढ़ने और उतरने के लिए एस्केलेटर लगा दिया गया है लेकिन बाकी प्लेटफार्मों पर सामान्य सीढ़िंयो से ही चढ़ना और उतरना है, तो फिर इसकी उपयोगिता क्या रह गयी।
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हड़बड़ी में शुरू किया गया एस्केलेटर
दरअसल इस एस्केलेटर के साथ ही अन्य प्लेटफार्मों पर लिफ्ट लगाए जाने की योजना शामिल थी। लेकिन रेल महकमे के कुछ अफसरों ने हड़बड़ी में आधी-अधूरी तैयारियों के साथ इसका उद्घाटन करा दिया। इसके संचालन के लिए सक्षम कर्मचारी की नियुक्ति के बिना ही हड़बड़ी में इस एक्सेलेटर को चालू करा दिया गया था। इस स्वचालित सीढ़ी के उद्घाटन के डेढ़ साल बाद भी न तो अन्य प्लेटफार्मों पर किसी तरह की लिफ्ट लग सकी है और न ही इस एस्केलेटर को सुचारू रूप से संचालित करने की व्यवस्था हो सकी है। इस पूरे विषय पर बात करने के लिए जब पत्रिका संवाददाता ने डीआरएम और जनसंपर्क अधिकारी से संपर्क का प्रयास किया तो वे उपलब्ध नहीं हो सके।


डिस्क्लेमर :इस आलेख में व्यक्त राय लेखक की निजी राय है। लेख में प्रदर्शित तथ्य और विचार से UPTRIBUNE.com सहमती नहीं रखता और न ही जिम्मेदार है
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