भारत पाकिस्तान के झगड़े 60/70 सालों से शुरु है,दो युद्ध भी हुए लेकिन पुलवामा जैसा योजनाबद्ध हमला नही हुआ था। नेहरू जी से लेकर मनमोहन जी तक प्रधानमंत्री हुए लेकिन किसी ने युद्धजन्य माहौल और जवानों की शहादत पर किसी ने राजनीति नही की। संघी विचारधारा वाले जिन्हें आजादी के मायने तक नही पता,तिरंगे से जिन्हें आज भी परहेज है वे मनुवादी सत्ता में होकर जवानों की अंतिम यात्रा में मुस्करा के रोड शो कर रहे है,पार्टी का प्रचार कर रहे हैं, वोटों की भीख माँग रहे हैं।
जवानों की शहादत पर भी शीश नही झुकने दूँगा ऐसे गीत गाकर फ़र्ज़ी राष्ट्रवाद को सही दिखाने की कोशिश कर रहे हैं।

देश असली और नकली राष्ट्रवाद के दिखावे को पहचान कर जवानों के शौर्य और शहादत का राजनीतिक फायदा उठाने वालों की साजिश को कभी सफल नही होने देगा।

जवानों के शौर्य का क्रेडिट
कायरों तुम मत लेना

जय हिंद
जय हिंद की सेना



डिस्क्लेमर :इस आलेख में व्यक्त राय लेखक की निजी राय है। लेख में प्रदर्शित तथ्य और विचार से UPTRIBUNE.com सहमती नहीं रखता और न ही जिम्मेदार है
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