नई दिल्ली। प्रधानमंत्री की नोटेबंदी की मुहिम भ्रष्टाचार,कालाधन, आतंकवादी फ़ंडिंग से चालू होकर कैश लेश इकॉनमी पर आकर रूकती हुई दिख रही हैं। नोटेबंदी के बाद पूरी सरकार और प्रधानमंत्री मोदी का पूरा ज़ोर कैश केश को बढ़ावा देता दिख रहा हैं। इसी की वजह से पीएम मोदी ने नोटेबंदी के फ़ैसले के बाद ऑनलाइन या डेबिट या क्रेडिट कार्ड से  लेन देन करने पर लगने वाला सर्विस चार्ज और सर्विस टैक्स को सरकार ने हटा लिया था।

परंतु नए साल में एक बड़ी बात निकल कर सामने आयी की सरकार ने इस फ़ैसले को अब वापस ले लिया हैं। 1जनवरी से पहले की हि तरह डेबिट और क्रेडिट कार्ड से पेमेंट करने पर चार्जेज़ लगेंगे।

अब पहले की तरह हि डेबिट कार्ड पर 1000 रुपये के लेन-देन पर 0.25 फीसदी यानी ज्यादा से ज्यादा 2.5 रुपये का सर्विस चार्ज देना होगा। 1000 रुपये से 2000 रुपये तक के लेन-देन पर सर्विस चार्ज ज्यादा से ज्यादा 0.5 फीसदी देना होगा। इसका मतलब है कि 2000 रुपये के लेन-देन पर 10 रुपये का सर्विस चार्ज देना होगा।

क्रेडिट कार्ड पर पहले की ही तरह ढाई फीसदी तक सर्विस चार्ज लगता रहेगा यानी 1000 रुपये के खरीद पर 25 रुपये का चार्ज देना होगा. क्रेडिट कार्ड या डेबिट कार्ड दोनों पर 2000 रुपये तक के लेन-देन पर सर्विस टैक्स में छूट जारी है.

अब बड़ी बात ये है की इस कैश लेश इकॉनमी से किसको फ़ायदा होगा।

कैश लेश लेन देन से सरकार के टैक्स में बढ़ोतरी होगी, वही दूसरी तरफ़ टैक्स चोरी रुकेगी तथा काला बाज़ारी पर भी लगाम लगेगी।

परंतु एक सवाल ये भी है की कैश लेश लेन देन पर लगाने वाले चार्जेज़ से आम जनता पर बोझ भी बड़ेगा। जहाँ जनता हार तरह के टैक्स दे रही है वही जगह फ़्री लेन देन पर लगने वाला शुल्क भी उपभोक्ता की जेब से हि लगेगा। एक तरफ़ जनता मँगाई कि मार झेल रही है, वही दूसरी तरफ़ कैश लेश लेन देन में लगने वाला अतिरिक्त चार्ज भी देना पड़ रहा है, जिससे आम जनता दोहरा मार झेल रहीं हैं। फ़िलहाल उड़ने आम जनता को कोई राहत मिलती भी दिख रही हैं।

 



डिस्क्लेमर :इस आलेख में व्यक्त राय लेखक की निजी राय है। लेख में प्रदर्शित तथ्य और विचार से UPTRIBUNE.com सहमती नहीं रखता और न ही जिम्मेदार है
SHARE

आपकी प्रतिक्रिया