केंद्रीय राज्यमंत्री सत्यपाल सिंह पर कसा शिकंजा

चुनाव आयोग से छुपाई जरूरी जानकारी 

सत्यपाल के फ्लैट में चलता था सेक्स रैकेट  

मुंबई। केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ. सत्यपाल सिंह पर मंत्री बनते ही शिकंजा कसना शुरू हो गया है। बताया जा रहा है कि मुंबई पुलिस आयुक्त रहे सत्यपाल ने चुनाव आयोग में दिए शपथ पत्र में वे जानकारियां नहीं दी हैं जो छुपाई नहीं जा सकती हैं। उन्होंने नौकरी से इस्तीफा देकर 2014 में हुए लोकसभा चुनाव के दौरान भारतीय जनता पार्टी जॉइन की थी और टिकट भी पाए थे। फिलहाल वे उत्तर प्रदेश की बागपत सीट से सांसद हैं। आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली ने सत्यपाल सिंह में खिलाफ सबूतों के साथ लोकसभा अध्यक्ष, प्रधानमंत्री और मुख्य चुनाव आयुक्त कार्यालय में शिकायत की है। गलगली ने सत्यपाल सिंह को तत्काल मंत्रिमंडल से बर्खास्त करने की मांग की है।

मुंबई के पूर्व पुलिस आयुक्त डॉ. सत्यपाल सिंह के केंद्रीय मंत्री बनते ही उनकी मुश्किलें बढ़नी शुरू हो गई हैं। गलगली ने कहा है कि वे डॉ. सिंह को लोकसभा की सदस्य्ता से बर्खास्त करने की मांग पहले ही कर चुके हैं। गलगली ने डॉ. सिंह पर जनता और चुनाव आयोग को उल्लू बनाने का आरोप लगाया है।

रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंत्रिमंडल का विस्तार किया गया। इसमें डॉ. सिंह को पहली बार राज्यमंत्री के तौर पर शामिल किया गया है। ऐसे में उन पर लगे आरोप मोदी की छवि पर विपरीत असर डाल सकते हैं। गलगली लोकसभा अध्यक्ष, प्रधानमंत्री और चुनाव आयोग के पास लिखित शिकायत करके डॉ. सिंह की संसद से सदस्य्ता रद्द करने की मांग करते रहे हैं। गलगली ने अपनी शिकायतों के साथ सूचना का अधिकार के तहत मिली जानकारी भी प्रधानमंत्री कार्यालय को उपलब्ध कराई है।

मुंबई पुलिस आयुक्त पद से इस्तीफा देकर डॉ. सिंह 2014 में उत्तर प्रदेश की बागपत सीट से निर्वाचित हुए हैं। लोकसभा चुनाव के दौरान चुनाव आयोग के समक्ष उम्मीदवार पर लंबित आपराधिक मामले, संपत्ति, देनदारियां सहित शैक्षिक योग्यता की जानकारी उपलब्ध करानी होती है। चुनाव आयोग के दिए गए फॉर्म में सरकारी वित्तीय संस्थान और सरकारी बकाया की देनदारी का ब्यौरा शामिल है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 2 मई 2002 को एसोसिएशन आॅफ डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स की याचिका पर आदेश भी जारी किया है। गलगली के अनुसार डॉ. सिंह ने सरकारी बकाया देनदारी की जानकारी चुनाव आयोग के समक्ष उजागर नहीं की है।

गलगली के अनुसार डॉ. सिंह ने मुंबई के पाटलिपुत्र सहकारी गृहनिर्माण संस्था में स्थित अपने फ्लैट को किराए पर तो दिया लेकिन आज तक रु 48,420 रुपए जुमार्ना की रकम अदा नहीं करने के बावजूद उसे आयोग के सामने सार्वजनिक नहीं किया। गलगली ने बताया कि डॉ. सिंह ने 10 वर्षों से फ्लैट को किराए पर देकर नियमों का उल्लंघन किया और फ्लैट को बिना जरूरी अनुमति के किराए पर देकर लाखों रुपए की कमाई भी की। डॉ. सिंह के ही फ्लैट में ही 2 जून 2014 को सेक्स रैकेट का भंडाफोड़ हुआ था। गलगली ने कहा कि इतनी गंभीर शिकायतों के बावजूद भी डॉ. सिंह को केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल करना जनता की आंखों में धूल झोंकना है।

बहरहाल, जिस तरह से सत्यपाल सिंह के खिलाफ शिकायतों का पुलिंदा बाहर आ रहा है, उनकी परेशानियां बढ़ती जा रही हैं।



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