किसी भी व्यक्ति विशेष को सेना द्वारा किए गए कार्यों का श्रेय देना कहा तक ठीक है ?

आज हमारी वायुसेना ने पाकिस्तान में सर्जिकल स्ट्राइक कर जैश -ए-मोहम्मद के कुछ ठिकानो को नष्ट किया ।
सेना की इस कार्य से देश भर में एक ख़ुशी की लहर दौड़ गयी । लेकिन कहीं ना कहीं सेना के इन कार्यों का राजनीतिकारण हो रहा है ।आज सवाल यह उठ रहा है कि क्या सेना के कार्यों का श्रेय एक व्यक्ति विशेष को देना ठीक है या क्या यह कहना ठीक है की एक सरकार आने के बाद ही सेना का विस्तार हुआ ?
भारतीय वायुसेना की स्थापना 1932 में हुई थी । तबसे लेकर आज तक हिंदुस्तानी वायुसेना ने पूरे सक्षम रूप से हिंदुस्तान की रक्षा करी और दुश्मनों को जवाब दिया । भारतीय वायुसेना ने तीन बार पाकिस्तान के साथ अहम जंगो में भाग लिया जिसमें सबसे अहम 1971 का बांग्लादेश लिबरेशन वार रहा । साथ ही साथ भारतीय वायुसेना ने 1984 में ऑपरेशन मेघदूत और 1999 में कारगिल वार को अंजाम दिया । यही नहीं हमारी भारतीय वायुसेना ने भयंकर प्राकृतिक आपदाओ में आम जनता की जान की रक्षा करी ।
लेकिन आज जो तत्कालीन सरकार और उनका गोदी मीडिया जिस तरह का परिदृश्य बना रहा है जिसमें श्रेय वायुसेना को कम और एक व्यक्ति विशेष को ज़्यादा दिया जा रहा है जिसपर अब हमें विचार करना ज़रूरी है ।
महज़ यह कह देना की इससे पहले हमारी फ़ौज और वायुसेना कुछ थी ही नहीं और तत्कालीन सरकार आने बाद ही सब कुछ हुआ। वो महज़ हमारे शहीदों और उनके बलिदानो का अपमान होगा ।
तत्कालीन सरकार की बात करे तो सिर्फ़ सर्जिकल स्ट्राइक जिसका भी पूरा श्रेय वायुसेना को जाता है इस सरकार का फ़ौजी व्यवस्थाओं में कोई योगदान नहीं है ।
इस सरकार में वायुसेना में भर्ती होने वालों नौजवानों के संख्या में कमी आयी साथ ही साथ इस सरकार द्वारा एक भी नया विमान तक ज़मीनी तौर पर नहीं आया जिसको सरकार अपनी खुद की उपलब्धि में गिना सके ।
सही मायनो में फ़ौजी कार्यवाही किसी सरकारी उपलब्धि में तब्दील नहीं होना चाहिए क्योंकि सरकार कोई भी रही जो सेना कार्य हमेश चलते आ रहें थे और आगे भी किसी की भी सरकार आने पर चलते रहेंगे ।



डिस्क्लेमर :इस आलेख में व्यक्त राय लेखक की निजी राय है। लेख में प्रदर्शित तथ्य और विचार से UPTRIBUNE.com सहमती नहीं रखता और न ही जिम्मेदार है
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