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राहुल गाँधी यु तो इशारों इशारों मोदीजी के कथित फैसले को ले कर हुए महाघोटाले की तरफ इशारा कर्   चुके हैं । जबकी दूसरी तरफ अरविन्द केजरीवाल और ममता बनर्जी सरकार के विरोध में खुल कर उतर  आये हैं । ममता बनर्जी आज़ाद पुर में आक्रामक नज़र आयी वही केजरीवाल अपने चिर परिचित अंदाज़ में ,कुछ कागज़ के टुकड़े लहराते नज़र आये । उन्होंने मोदी जी पर मुख्यमंत्री रहते हुए बिडला समूह और सहारा समूह से रिश्वत लेने का आरोप लगाया । अब कितना दम उनकी बात में था ?

ये आने वाला समय बतायेगा क्युकी राजनैतिक  आरोपों का सच कभी सामने आता नहीं  वो एक पहेली बन कर रह जाता हैं ।

कभी कभी  घोटाले किये नहीं  जाते जरा सी चूक से हो जाते हैं और इतने बड़े की इनसे बना नासूर किसी भी राष्ट्र की अर्थव्यवस्था पर एक कोड़ बन कर रह जाता हैं जिसकी पीड़ा देशवासियों को उठानी पड़ती हैं । प्रधानमंत्री मोदी के अति ज़ल्दबाज़ी  में लिए गए कदम की आलोचना सब तरफ हो रही हैं ,उसके फलस्वरूप देश में फ़ैली अराजकता एक सवाल बन कर पूरे देश में फ़ैल गयी हैं ।

किसी भी देश में जिसमे इन्टरनेट मौजूद हैं ,उससे आर्थिक अपराध करना बहुत आसान और पैसे का ट्रांजिक्शन तो और भी आसान हैं ।

आठ तारीख रात अचानक आठ बजे एक फ़िल्मी नायक की तरह उभरे मोदीजी ने रात बारह बजे के बाद ५०० और १००० के नोट की वैधता समाप्त होने की बात कही ,साथ ही कहा की कालेधन को और जाली नोटों को समाप्त करने के लिए ये कदम लिया जा रहा हैं ।

इस फैसले से कुछ सवाल उठाना स्वभाविक भी हैं ,जो शायद एटीएम और बेंको के आगे लगी जनता को  देख कर  हर देशवासी बस उसी को  देख रहा था मीडिया वही दिखा रहा था । जो सरकार चाहती थी । वो मीडिया न तो सही सवाल उठा रहा था न सही बात बता रहा था । एक बहस थी दो विचारधाराओं के बीच जो इसको सही नहीं  मानते थे या वो जो इसको सही मानते थे ।

१ क्या मोदी सरकार बतायेगी की उसने क्या जानबूझ कर चार घंटे का समय उन मोटे कालेधन का लिबास धारण किये मगरमच्छो के लिए दिया , उनका लबादा सफ़ेद करने के लिए ?

२ ओन लाइन ट्रांजिक्शन कितने हुए जिसमे भारतीय रूपये को दुसरे देशो की करेंसी में बदला गया ?

३ ब्लेक में सोने के व्यापार को कैसे पर्दाफाश कर पायेगी सरकार ,क्या आठ तारीख को रात १२ बजे तक हुए सारे लेंन  देंन लीगल थे ?

४.अगर इसका जबाब “ हां” में हैं तब सरकार इस  देश के ,इस सदी के सबसे बड़े महाघोटाले का शिकार  हुआ हैं ।

५ सरकार को देश की आशंकाओं का ज़बाब संसद में और जनता को देना ही होगा ।

वरना छोडो दिल्ली जनता आती हैं ।

राहुल गाँधी एक जिम्मेवार विपक्ष की भूमिका में नज़र आ रहे हैं ।वो पहले दिन से इस आदेश के बाद फ़ैली अव्यवस्थाओ को दूर करने के लिए सरकार से कह रहे हैं ।

लगता हैं सरकार ने गहरा काला चश्मा पहना  हैं । जो सत्ता की शक्ति से और गहरा हो गया हैं ।आज संसद को सडक की हकीकत दिखाई नहीं  दे  रही ।



डिस्क्लेमर :इस आलेख में व्यक्त राय लेखक की निजी राय है। लेख में प्रदर्शित तथ्य और विचार से UPTRIBUNE.com सहमती नहीं रखता और न ही जिम्मेदार है
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Nationalist, influencer,social media activist , writer , poet and public concerned

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