उ.प्र में चुनाव के इस मौसम में रैलियों की बारिश हो रही है। गाजीपुर की जनता भी ऐसी दो बडी रैलियों की गवाह बनी। चुनावी समीकरन में जोड़ तोड़ की नीति तो होती है पर इस बार विमुद्रीकरन् एक बडी भुमिका निभाने वली है। वहीँ आज प्रधानमंत्री जी के कुशीनगर रैली में अपने पुराने वादे को भूलने पर जनता निराश भी दिखी। लोकसभा चुनाव के वक़्त मोदी जी ने बंद पडे चीनी कारखाने को शुरू करने का वादा किया था पर सरकार बनने के ढाई वर्ष बाद भी कुछ नहीं हुआ। 15109460_1371573976218573_5041019334551152131_n modi

मोदी जी के तर्कश के दो तीर, एक विमुद्रीकरण और दूसरी सेना की कार्यवायी, क्या जनता इसी नाम पर  वोट देगी? दोनो रैलीओ मे भीड़ की तुलना की जाये तो सपा रैली मे आई भीड की संख्या, मोदी जी की रैली से अधिक थी।

विमुद्रीकरण के साथ जनता खडी है, पर क्या उ.प्र की जनता जो किसानो और युवाओं की है, बस इसी फैसले से अपना वोट तय करेगी? क्या जनता भूलेगी,लंबी कतारे और अपनी कठिनाइयां जो उन्होने अपनी रोज मर्रा की जिन्दगी मे मह्सुस की है? शादी के मौसम मे इन कठिनाइयों को माफ करेगी जनता? उ.प्र में को-ऑपरेटिव बैंको का जाल बिछा है और ऐसे मे इन बैंको मे पैसे नही होने से किसानो को जो परेशानी हो रही है, क्या जनता देगी मोदी का साथ?

क़िसान और विद्यार्थी, जो कर्ज के बोझ तले दबे है, उनका कर्ज माफ़ी की जगह सरकार उद्योगपतियों का कर्ज ‘वेव ऑफ’ कर रही है। वही क़िसान और विद्यार्थी इससे बचने के लिये आत्महत्या का सहारा ले रहे है। तो क्या सिर्फ विमुद्रीकरण से जनता अपना खेमा तय करेगी. सपा की रैली की शुरुआत, गाजीपुर के बड़े नेता स्व श्री राज नारायण जी को श्रधांजलि दे कर की गयी, वही मोदी जी ने उंनका जिक्र तक नही किया, इससे भूमिहार वोटरो का झुकाव किसकी ओर होगा इसका अन्दाजा लगाया जा सकता है। रैली मे उभरते युवा नेता आदित्य यादव की मौजुदगी भी एक आकर्षण का केंद्र रहा। शिवपाल जी के सुपुत्र आदित्य, जो की उ.प्र को ऑपरेटिव फेडेरेशन लि. के अध्यक्ष है, उन्हे किसानो के हालत का बोध सबसे ज्यादा है।  इस कारण, उ.प्र की जनता को इनसे कफी उम्मीदे है। भीड, विमुद्रीकरण का प्रभाव, चुनावी नीति और समीकरण को देखते हुये ये समझा जा सकता है कि जनता को लुभाने मे कौन सफल हुआ। रैलियां तो होती रहेंगी पर जनता किस ओर जाएगी इसका इन्तेजार रहेगा।

This post is written by Raj Nayan a young engineer, political and social thinker.



डिस्क्लेमर :इस आलेख में व्यक्त राय लेखक की निजी राय है। लेख में प्रदर्शित तथ्य और विचार से UPTRIBUNE.com सहमती नहीं रखता और न ही जिम्मेदार है
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