मुंबई। देश को झकझोर देने वाले बहुचर्चित आदर्श घोटाला मामले में मुंबई उच्च न्यायालय ने पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण को बड़ी राहत दी है। अदालत ने महाराष्ट्र के राज्यपाल के उस आदेश को रद्द कर दिया जिसके तहत चव्हाण पर मुकदमा चलाने की अनुमति दी गई थी। चव्हाण ने अदालत का आभार मानते हुए कहा है कि कुछ लोग उन्हें निजी तौर पर राजनीतिक नुकसान पहुंचाना चाहते थे लेकिन वे सफल नहीं हुए। चव्हाण ने कहा कि कथित आदर्श घोटाला में उनका नाम आना एक हादसा था जिसे वे जल्द से जल्द भूलना चाहते हैं।
शुक्रवार को अदालत ने राज्यपाल की सीबीआई को दी गई उस अनुमति को रद्द कर दिया जिसके तहत चव्हाण पर आदर्श घोटाला के एक आरोपी के तहत मुकदमा चलाया जाना था। पत्रकारों से बातचीत में चव्हाण ने कहा कि इस मामले का पार्टी पर कोई असर नहीं पड़ा। पार्टी ने उन पर भरोसा जताया और नांदेड़ लोकसभा सीट से उम्मीदवारी दी। उन्होंने नांदेड़ के मतदाताओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि लोगों ने उनका साथ दिया और वे भी लोगों का भरोसा जीतने में सफल रहे। उन्होंने कहा कि यह एक लंबी कहानी थी जिए वे याद नहीं रखना चाहते।
बता दें कि दक्षिण मुंबई स्थित आदर्श हाउसिंग सोसायटी में बड़े घोटाले का आरोप लगने के बाद कई वरिष्ठ नौकरशाहों पर कार्रवाई की गई है। इस मामले में जमीन आवंटन सहित कई तरह की अनुमति दिए जाने को लेकर चव्हाण सहित पूर्व मुख्यमंत्री सुशीलकुमार शिंदे और विलासराव देशमुख का नाम चर्चा में रहा है। देशमुख की मृत्यु हो चुकी है। महाराष्ट्र के राज्यपाल सी. विद्यासागर राव ने अप्रैल 2016 में चव्हाण के खिलाफ मुकदमा चलने के लिए मंजूरी दी थी। वर्ष 2013 में तत्कालीन गवर्नर के. शंकरनारायणन ने चव्हाण पर मुकदमा चलाने की अनुमति नहीं दी थी। मामले की जांच सीबीआई कर रही है। जब यह घोटाला सामने आया था उस समय चव्हाण महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री थे। उन्हें इस घोटाले की वजह से कुर्सी छोडनी पड़ी थी और उनकी जगह पृथ्वीराज चव्हाण को मुख्यमंत्री बनाया गया था।



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