मुंबई। भारतीय जनता पार्टी के विधायक एकनाथ खड़से अब सामाजिक कार्यकर्ता पर अश्लील टिप्पणी मामले में बुरी तरह से घिर गए हैं। सामाजिक कार्यकर्ता अंजलि दमानिया ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र भेज कर खड़से को तत्काल गिरफ्तार करने की मांग की है। हालांकि, खड़से ने दमानिया के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि उन्होंने उन पर कोई अश्लील टिप्पणी नहीं की है। इसके बाद भी उनकी मुश्किलें बढ़ सकती हैं। खड़से फडणवीस मंत्रिमंडल में राजस्व मंत्री रह चुके हैं। भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते उन्हें कुछ ही महीनों में मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था।

दमानिया ने अपने शिकायती पत्र में कहा है कि उन्हें कुछ लोगों ने जानकारी दी है कि खड़से ने उनके खिलाफ अश्लील भाषा का प्रयोग किया है। बताया जा रहा है कि हाल ही में खड़से ने अपने जन्मदिन पर आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान दमानिया पर कथिततौर पर अश्लील टिप्पणी की है।

इधर, बुधवार को भाजपा प्रदेश कार्यालय में आयोजित पत्रकार वार्ता के दौरान खड़से ने कहा कि उन्होंने आज तक किसी महिला के खिलाफ अश्लील भाषा का प्रयोग नहीं किया है। उन्होंने दमानिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्होंने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष शारद पवार और राकांपा प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे पर भी भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे, उनका क्या हुआ? भाजपा नेता ने कहा कि वे प्रसिद्धि पाने के लिए आरोप लगाती हैं।

बता दें कि एकनाथ खड़से भाजपा के वरिष्ठतम नेताओं में गिने जाते हैं। महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव में मिली सफलता के बाद भाजपा की ओर से खड़से मुख़्यमंत्री पद के प्रबल दावेदार थे। लेकिन, नागपुर में आरएसएस का मुख्यालय होने के नाते वहीँ से चुने गए फडणवीस के नाम पर संघ ने मुहर लगाई और खड़से दौर से बाहर हो गए। राजनीतिक गलियारों में खड़से और फडणवीस की खींचतान के किस्से हमेशा से चर्चा का विषय रहे हैं। दमानिया ने पहले भी खड़से पर पुणे स्थित भोसरी एमआईडीसी में करोड़ों की जमीन के घोटाले के आरोप के साथ ही उन पर अंडरवर्ल्ड सरगना दाऊद इब्राहीम से संबंध के आरोप भी लगाए हैं। इन आरोपों पर सरकार ने जांच के आदेश दिए हैं। जबकि खड़से ने दावा किया है कि दमानिया के लगाए गए सारे आरोप गलत साबित हुए हैं।

बहरहाल, जिस तरह से खड़से पर आरोपों की झड़ी लगी हुई है उससे उनकी मुश्किलें ख़त्म होती नहीं दिखाई दे रही हैं। भाजपा में कभी अग्रिम पंक्ति में सुमार रहे खड़से जिस तरह से पार्टी के सत्ता में रहते हुए सत्ता सुख नहीं भोग पा रहे हैं उससे उनकी बेचैनी को समझना कठिन नहीं है। संभावना इस बात की भी है कि खड़से ने यदि पार्टी से बगावत कर दिया तो उसकी भरपाई भाजपा को महंगी पड़ेगी। देखना है कि खड़से कब तक दरकिनार रहेंगे।



डिस्क्लेमर :इस आलेख में व्यक्त राय लेखक की निजी राय है। लेख में प्रदर्शित तथ्य और विचार से UPTRIBUNE.com सहमती नहीं रखता और न ही जिम्मेदार है

आपकी प्रतिक्रिया